Bachchon Ke Naam Kaise Rakhe? : हम सभी जानते ही हैं कि जिसके औलाद न हो रही हो, तो वो औलाद पाने के लिए दुआ करता भी है, करवाता भी है, और दवाएं भी करता है, और अपनी तरफ से कोई कसर नहीं उठा रखता, सिर्फ इस वजह से कि उसके आँगन में भी बच्चे की किलकारी गूंजे, सही मानों में वही समझ पाता है कि औलाद कितनी बड़ी नेअमत है |
जी हाँ! औलाद अल्लाह की सबसे अज़ीम नेअमत है। अगर बेटा हो तो नेअमत, और अगर बेटी हो तो रहमत, दोनों ही अल्लाह की तरफ़ से दिया हुआ बहुत ही अनमोल तोहफ़ा हैं । लेकिन, जहां अल्लाह तआला हमें इस नेअमत से नवाज़ता है, वहीं इसके कुछ हुकूक (अधिकार) भी बताये हैं। इन्हीं हुकूक में से एक बड़ा हक़ है जो उसको पैदा होते ही मिलता है वो है अच्छा नाम रखना |
तो चलिए, आज हम इस टॉपिक को अच्छी तरह समझें कि कौन से नाम रखने चाहियें, और कौन से नहीं, और कौन से अच्छे नाम हैं जिनको हमें ध्यान में रखना चाहिए |
Bachchon Ke Naam Kaise Rakhe?
बच्चे का अच्छा नाम रखना
हमारे नबी ﷺ ने फरमाया:
“इंसान अपने बच्चे को सबसे पहला तोहफ़ा उसका नाम देता है, इसलिए उसे चाहिए कि अच्छा नाम रखे।”
एक और हदीस में है:
“क़यामत के दिन तुम अपने और अपने बाप–दादा के नामों से पुकारे जाओगे। लिहाज़ा अच्छे नाम रखा करो।”
यानी नाम सिर्फ़ एक आवाज़ नहीं है बल्कि नाम बच्चे की पहचान बनेगा, उसकी ज़िंदगी की दिशा तय करेगा ।

बच्चे का नाम रखना पेरेंट्स की ज़िम्मेदारी
आजकल हमारे समाज में एक अजीब चलन है, लोग अपने बच्चों का नाम खुद रखने के बजाय किसी रिश्तेदार, फूफा, मौसी, चाचा, या किसी आम इंसान पर छोड़ देते हैं, जिन्हें अक़्सर इस्लामी नामों का इल्म नहीं होता। जिसका नतीजा होता है कि
- ऐसे नाम रख दिए जाते हैं जिनके मीनिंग ही नहीं होते,
- या बुरे मीनिंग होते हैं,
- या शरई तौर पर नाजायज़ होते हैं,
- या ऐसी सिफ़ात जिनका इस्तेमाल सिर्फ़ अल्लाह के लिए शोभा देता है।
इसलिए अच्छा नाम रखना पेरेंट्स की पहली ज़िम्मेदारी है, और इसे किसी ऐसे इंसान को नहीं देना चाहिए जिसे इल्म न हो।
अगर खुद नाम न सूझे, तो क्या करें?
तो अब सवाल उठता है कि अगर ख़ुद अच्छा नाम न सूझे तो क्या करें? तो जवाब बहुत आसान है कि अगर नाम ही नहीं पता है तो किसी किसी आलिम-ए-दीन से कहें कि वो बच्चे के लिए कोई मुबारक और अच्छा नाम तजवीज़ करें।
और अगर नाम तो पता है लेकिन उसका मीनिंग नहीं पता है तो पूछ लें ये इसका मतलब क्या है? और ये नाम रखना चाहिए या नहीं, तो आपका मसअला इंशाअल्लाह हल हो जायेगा |
अच्छे नाम का बच्चे की ज़िंदगी पर असर
अब आप के ज़हन में आ सकता है कि शरीअत की नज़र में नाम अच्छा न हो या उसकी मीनिंग अच्छी न हो तो क्या होगा? देखिये! अच्छे नाम का अच्छा असर होता है, और बुरे नाम का बुरा असर होता है। हर नाम में रूहानी असर, बरकत, और शख्सियत दोनों छिपे होते हैं
और बच्चा उम्र भर अपना नाम सुनता है। और उसे अपने दिल से लगाए रखता है। और क़यामत के दिन भी इसी नाम से पुकारा जाएगा।इसलिए अच्छा नाम अच्छे मीनिंग के साथ ही रखें |
अच्छे नाम कौन कौन से हैं?
यहाँ पर कुछ मिसालें दी जा रही हैं, अच्छा नाम वो है
1. जिसका अच्छा मतलब (meaning) हो, जैसे:
- इब्राहीम — अल्लाह का खलील
- उस्मान — साहसी, महान
- हसन / हुसैन — खूबसूरत, नेक
- आसिया — दयालु
- फातिमा — बचाने वाली
- आयशा — ज़िंदा रहने वाली
2. जिसमें तकब्बुर या फख्र न हो, जैसे:
- बादशाह
- शहनशाह
- फतेह-ए-आलम
ये नाम घमंड की बू देते हैं, इसलिए न रखें।

3. जिसका मतलब ग़लत न हो, जैसे:
- आसी — नाफ़रमान
- अबतर — कटा हुआ
इस तरह के नाम बिल्कुल न रखें।
4. नाम बेकार और फिज़ूल न हो, जैसे:
- पप्पू
- बुधवा
- बिल्लू
इनका कोई मानी नहीं ना दुनिया में, ना दीन में।
ये नाम नहीं रखने चाहियें
1. ताहा, यासीन, तासीन जैसे नाम
कई लोग बच्चों का नाम रखते हैं ताहा, यासीन, तासीन, लेकिन ये नाम नहीं रखने चाहियें क्यूंकि ये हुरूफे मुक़त्त’आत हैं, और ये कुरआन के ऐसे हरूफ हैं जिनके मीनिंग किसी को भी मालूम नहीं, यहाँ तक कि तफ़सीर में भी इनकी मीनिंग नहीं मिलती।
2. अल्लाह के लिए खास सिफ़ात वाले नाम
कुछ सिफ़ात सिर्फ़ अल्लाह तआला के लिए हैं, उन्हें अकेले नाम के रूप में बच्चे के लिए नहीं रखा जा सकता। जैसे:
- रहमान
- खालिक
- रज़्ज़ाक
लेकिन अगर इनके साथ अब्द लगाकर नाम रखा जाये तो रख सकते हैं जैसे अब्दुर रहमान, अब्दुल खालिक, अब्दुर रज्ज़ाक वगैरह
3. निकनेम बिगाड़कर न पुकारें, जैसे:
- बिलाल → बिल्लू
- रिज़वान → रिज्जू
- हबीब → बिब्बू
हमारे नबी ﷺ के प्यारे नाम जिन्हें आँख बंद करके रख सकते हैं
यहाँ कुछ बेहद सुंदर नाम, जो नबी ﷺ के अलक़ाब हैं:
- अहमद — बहुत तारीफ किया हुआ
- अमीन — भरोसेमंद
- बशीर — खुशखबरी देने वाला
- जव्वाद — सख़ी
- हादी — सही राह दिखाने वाला
- हमीद — तारीफ करने वाला
- हबीब — प्यारा
- खलील — गहरा दोस्त
- रशीद — समझदार
- शरीफ़ — इज़्ज़त वाला
- सिराज — चिराग
- तय्यिब — पाक
- मुम्ताज़ — बेहतरीन
- मुस्तफ़ा — चुना हुआ
- मुदस्सिर — ओढ़ने वाला
- मुज़म्मिल — लपेटने वाला
- मुनीर — रोशन
- मंसूर — जिसकी मदद की जाए
- मुकर्रम — इज़्ज़त वाला
ये सारे नाम बरकत, रूहानियत और मोहब्बत से भरे हुए हैं।
बच्चा पैदा होने के कितने दिन बाद नाम रखा जाए?
सुन्नत तरीका तो ये है कि सातवें दिन नाम रखा जाए, सर मुंडाया जाए, और अकीका किया जाए, यही सबसे अफ़ज़ल तरीका है।
नतीजा
बच्चों का नाम सिर्फ़ उनका टैग नहीं, ये उनका माज़ी (अतीत), उनका हाल (वर्तमान), और उनकी ज़िंदगी भर की पहचान होता है। इसलिए नाम रखते समय मीनिंग देखें, सुन्नत और बरकत देखें
और कोशिश करें कि नाम हमारे नबी ﷺ, सहाबा, अहले बैत और औलिया के नामों पर रखें, ताकि बच्चे का इन मुकद्दस हस्तियों से रूहानी ताल्लुक बने और उनकी ज़िंदगी इन नामों की बरकत से नूरानी हो जाए।