Best Seerat un Nabi Speech for Students (Hindi/Urdu) सीरतुन-नबी तक़रीर

क्या आप भी School के Program के लिए किसी ऐसे दमदार Topics की तलाश में हैं, जो सब पर छा जाए? अब आपको अपनी Speech को लेकर परेशान होने की बिलकुल ज़रुरत नहीं है, क्यूंकि आज हम आपके लिए एक ऐसी बेहतरीन Speech (taqreer) लेकर आए हैं, जो स्टूडेंट्स के अंदर जोश भर देगा।जिसका मौज़ू है Seerat un Nabi |

अगर आप मदरसा या स्कूल में Best Seerat Un Nabi Speech पूरे एतमाद (Confidence) के साथ पेश करना चाहते हैं, तो यह उम्दा Speech आपके लिए बेस्ट है। चाहे Milad-un-Nabi का जश्न हो या कोई और मौक़ा, यह Taqreer आपके प्रोग्राम को यादगार बना देगी और आपको बेहिसाब Sawab भी दिलाएगी।

जहालत की ज़ंजीरें जब इंसानियत को जकड़ लें, तो रहमत उतरती है,
ज़ुल्म के सायों में जब इन्साफ़ खो जाए, तो नूर तूलू होता है,

जब हक़ की राहें धुंधली पड़ जाएँ, तो हिदायत का चिराग़ जलता है,
और जब अंधेरा हद से बढ़ जाये तो अल्लाह अपने आख़िरी पैग़म्बर ﷺ को भेजता है।

अज़ीज़ भाइयों और बहनों!

दुनिया की तारीख़ का हर सफ़ा हमें यही बताता है कि जब इंसान अपनी हद से गुज़रता है, अपने अस्ल मक़सद को भूल जाता है, जब इंसाफ़ मिट जाता है और इंसानियत शर्मसार हो जाती है, तो अल्लाह तआला अपनी रहमत से पैग़म्बर भेजता है।

लेकिन ऐ हाज़रीन! वो दौर जो नबी-ए-आख़िर-उज़-ज़माँ ﷺ की आमद से पहले था, इंसानियत की तारीख़ का सबसे संगीन और तारीक़ दौर था।

वो दौर जब जहालत का अंधेरा गहरा चुका था।
वो दौर जब इंसाफ़ का तराज़ू उलट चुका था।
वो दौर जब बेटियाँ ज़िंदा दफ़न कर दी जाती थीं।
वो दौर जब ग़ुलाम इंसान नहीं, सिर्फ़ एक सामान समझे जाते थे।
वो दौर जब शराब, जुआ और फह्हाशी को तहज़ीब का हिस्सा माना जाता था।
वो दौर जब औरत को इज़्ज़त नहीं, बल्कि बेजान खिलौना समझा जाता था।

ऐसे तारीक़ माहौल में, जब उम्मीद की कोई किरण नज़र नहीं आती थी—रहमतुल्लिल आलमीन अलैहिस सलातु वस्सलाम का सूरज तूलू हुआ।

Best Seerat un Nabi Speech

मोहतरम हाज़रीन !
आप ﷺ की आमद सिर्फ़ अरब के रेगिस्तान के लिए नहीं थी।
आप ﷺ की आमद सिर्फ़ उस वक़्त की तारीकी मिटाने के लिए नहीं थी।
बल्कि आप ﷺ की आमद पूरी इंसानियत के लिए रहमत, हिदायत और रोशनी का पैग़ाम लेकर आई।

आप ﷺ आए तो तौहीद का नग़्मा गूँज उठा।
आप ﷺ आए तो इंसान को इंसानों की ग़ुलामी से निकलकर सिर्फ़ अल्लाह का बंदा बनने का शर्फ़ हासिल हुआ।
आप ﷺ आए तो औरत को वो मक़ाम मिला जो तारीख़ में किसी और ने नहीं दिया।
आप ﷺ आए तो ग़ुलामी की ज़ंजीरें टूटीं और इंसान बराबरी की राह पर चला।
आप ﷺ आए तो इल्म और तालीम को इंसानियत का असल ज़ेवर बना दिया गया।

मोहतरम सामईने किराम !

इतिहास गवाह है – कि जब हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ि. जैसे सख़्त दिल इंसान, जो कभी इस्लाम के दुश्मन थे कुरआन की तिलावत सुनकर नर्म पड़ गए और इस्लाम के सिपहसालार बने, तो कायनात ने कहा—ये आमद-ए-रसूल ﷺ का करिश्मा है।

जब हज़रत उस्मान ग़नी रज़ि. ने अपनी दौलत अल्लाह की राह में लुटा दी, और उम्मत की प्यास बुझाने के लिए कुआँ खरीदकर सबके लिए वक़्फ़ कर दिया, तो इंसानियत ने कहा—ये आमद-ए-रसूल ﷺ का करिश्मा है।

जब हज़रत अली कर्रमल्लाहु वज्हहू ने बचपन से लेकर आख़िरी दम तक रसूल ﷺ की गोद में रहकर इल्म, शुजाअत और इंसाफ़ का पैग़ाम फैलाया, तो दुनिया ने कहा—ये आमद-ए-रसूल ﷺ का नतीजा है।

और जब पहली वही “इक़रा” उतरी और इल्म की चिंगारी ने जहालत के अंधेरे मिटाए, तो ज़मीन-ओ-आसमान गूंज उठे— ये आमद-ए-रसूल ﷺ का सबसे बड़ा इनक़लाब है।

मोहतरम हाज़रीन !
आप ﷺ ने इंसानियत को इंसाफ़ सिखाया।
आप ﷺ ने अमानतदारी को ईमान का हिस्सा बना दिया।
आप ﷺ ने ग़रीबों को सहारा और अमीरों को रहनुमाई दी।
आप ﷺ ने बताया कि मोहब्बत, रहमत और बराबरी ही असल इंसानियत है।
आप ﷺ ने फरमाया: “सबसे बेहतर इंसान वो है जो इंसानियत के लिए सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद हो।”

अज़ीज़ सामईन-ए-कराम!
आज हमारी दुनिया में फिर वही आलम लौट रहा है।
आज फिर इंसाफ़ कमज़ोर और ज़ुल्म ताक़तवर है।
आज फिर ग़रीब दबे-कुचले हैं और अमीर इतराते हैं।
आज फिर औरतें अपने हक़ से महरूम की जा रही हैं।
आज फिर इंसानियत सुकून तलाश कर रही है।

तो सुन लीजिए—
आज अगर कोई शख़्स सुकून चाहता है, तो उसे सीरत-ए-मुहम्मदी ﷺ अपनानी होगी।
आज अगर कोई क़ौम दुनिया व आखिरत दोनों की तरक़्क़ी चाहती है, तो उसे पैग़म्बर-ए-इस्लाम ﷺ की तालीमात पर अमल करना होगा।
आज अगर इंसानियत अमन चाहती है, तो उसे कुरआन और सीरत की तरफ़ लौटना होगा। क्योंकि सुकून, तरक़्क़ी और नजात का दरवाज़ा सिर्फ़ और सिर्फ़ नबी की तालीमात ही से खुलता है।

अज़ीज़ सामईन-ए-कराम!
आमद-ए-रसूल ﷺ इंसानियत के लिए नई सुबह है।
आमद-ए-रसूल ﷺ जहालत के अंधेरों में रौशनी है।
आमद-ए-रसूल ﷺ बराबरी और इंसाफ़ का पैग़ाम है।
आमद-ए-रसूल ﷺ रहमतुल्लिल आलमीन का सबसे बड़ा एहसान-ए-अज़ीम है।

Best Seerat un Nabi Speech

मोहतरम हाज़रीन!
आज अगर हम सच में आमद-ए-रसूल ﷺ का हक़ अदा करना चाहते हैं तो हमें सिर्फ़ जशन और नात तक महदूद न रहें, बल्कि अपनी ज़िंदगी को नबी की सीरत के आइने में ढालें |

आइए हम सब ये अहद करें—
कि हम झूठ को छोड़ देंगे और सच का दामन थामेंगे।
हम नफ़रत के बजाय मोहब्बत फैलाएँगे।
हम ज़ुल्म के बजाय इंसाफ़ क़ायम करेंगे।
हम अपनी औलाद को इल्म और अख़लाक़ की दौलत देंगे।
हम अपने कारोबार में अमानतदारी और अपने ताल्लुक़ात में इंसानियत को ज़िंदा रखेंगे।

क्योंकि यही वो रास्ता है जो हमें रसूल-ए-करीम ﷺ के क़रीब ले जाता है।

आइये हम सब दुआ करें कि:
या अल्लाह! हमें सीरत-ए-मुहम्मदी ﷺ पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।
या अल्लाह! हमारे दिलों को मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ से रोशन कर दे।
या अल्लाह! हमें क़ुरआन और सीरत की रौशनी में ज़िंदगी गुज़ारने वाला बना दे।
आमीन, या रब्बल आलमीन।

आपकी समाअतों का शुक्रिया!


تقریر: آمدِ رسول ﷺ – انسانیت کی نئی صبح

جہالت کی زنجیریں جب انسانیت کو جکڑ لیں، تو رحمت اترتی ہے
ظلم کے سائے میں جب انصاف کھو جائے، تو نور طلوع ہوتا ہے

جب حق کی راہیں دھندلی پڑ جائیں، تو ہدایت کا چراغ جلتا ہے
اور جب اندھیرا حد سے بڑھ جائے تو اللہ اپنے آخری پیغمبر ﷺ کو بھیجتا ہے۔

!عزیز بھائیو اور بہنو

دنیا کی تاریخ کا ہر صفحہ ہمیں یہی بتاتا ہے کہ جب انسان اپنی حد سے گزرتا ہے، اپنے اصل مقصد کو بھول جاتا ہے، جب انصاف مٹ جاتا ہے اور انسانیت شرمسار ہو جاتی ہے— تو اللہ تعالیٰ اپنی رحمت سے پیغمبر بھیجتا ہے۔

لیکن اے حاضرین! وہ دور جو نبیِ آخر الزماں ﷺ کی آمد سے پہلے تھا، انسانیت کی تاریخ کا سب سے سنگین اور تاریک دور تھا۔

وہ دور جب جہالت کا اندھیرا گہرا چکا تھا۔
وہ دور جب انصاف کا ترازو الٹ چکا تھا۔
وہ دور جب بیٹیاں زندہ دفن کر دی جاتی تھیں۔
وہ دور جب غلام انسان نہیں، صرف ایک سامان سمجھے جاتے تھے۔
وہ دور جب شراب، جوا اور فحاشی کو تہذیب کا حصہ مانا جاتا تھا۔
وہ دور جب عورت کو عزت نہیں، بلکہ بے جان کھلونا سمجھا جاتا تھا۔

ایسے تاریک ماحول میں، جب امید کی کوئی کرن نظر نہیں آتی تھی
رحمتُ للعالمین ﷺ کا سورج طلوع ہوا۔

!محترم حاضرین
آپ ﷺ کی آمد صرف عرب کے ریگستان کے لیے نہیں تھی۔
آپ ﷺ کی آمد صرف اُس وقت کی تاریکی مٹانے کے لیے نہیں تھی۔
بلکہ آپ ﷺ کی آمد پوری انسانیت کے لیے رحمت، ہدایت اور روشنی کا پیغام لے کر آئی۔

آپ ﷺ آئے تو توحید کا نغمہ گونج اٹھا۔
آپ ﷺ آئے تو انسان کو انسانوں کی غلامی سے نکل کر صرف اللہ کا بندہ بننے کا شرف حاصل ہوا۔
آپ ﷺ آئے تو عورت کو وہ مقام ملا جو تاریخ میں کسی اور نے نہیں دیا۔
آپ ﷺ آئے تو غلامی کی زنجیریں ٹوٹیں اور انسان برابری کی راہ پر چلا۔
آپ ﷺ آئے تو علم اور تعلیم کو انسانیت کا اصل زیور بنا دیا گیا۔

محترم سامعینِ کرام!

تاریخ گواہ ہے – جب حضرت عمر فاروقؓ جیسے سخت دل انسان، جو کبھی اسلام کے دشمن تھے، قرآن کی تلاوت سن کر نرم پڑ گئے اور اسلام کے سپہ سالار بنے، تو کائنات نے کہا— یہ آمدِ رسول ﷺ کا کرشمہ ہے۔

جب حضرت عثمان غنیؓ نے اپنی دولت اللہ کی راہ میں لٹا دی اور امت کی پیاس بجھانے کے لیے کنواں خرید کر سب کے لیے وقف کر دیا، تو انسانیت نے کہا— یہ آمدِ رسول ﷺ کا کرشمہ ہے۔

جب حضرت علی کرم اللہ وجہہٗ نے بچپن سے آخری دم تک رسول ﷺ کی گود میں رہ کر علم، شجاعت اور انصاف کا پیغام پھیلایا، تو دنیا نے کہا— یہ آمدِ رسول ﷺ کا نتیجہ ہے۔

اور جب پہلی وحی “اقرأ” اتری اور علم کی چنگاری نے جہالت کے اندھیرے مٹائے، تو زمین و آسمان گونج اٹھے
یہ آمدِ رسول ﷺ کا سب سے بڑا انقلاب ہے۔

!محترم حاضرین
آپ ﷺ نے انسانیت کو انصاف سکھایا۔
آپ ﷺ نے امانت داری کو ایمان کا حصہ بنا دیا۔
آپ ﷺ نے غریبوں کو سہارا اور امیروں کو رہنمائی دی۔
آپ ﷺ نے بتایا کہ محبت، رحمت اور برابری ہی اصل انسانیت ہے۔
آپ ﷺ نے فرمایا:
“سب سے بہتر انسان وہ ہے جو انسانیت کے لیے سب سے زیادہ فائدہ مند ہو।”

!عزیز سامعینِ کرام

آج ہماری دنیا میں پھر وہی عالم لوٹ رہا ہے
آج پھر انصاف کمزور اور ظلم طاقتور ہے۔
آج پھر غریب دبے کچلے ہیں اور امیر اتراتے ہیں۔
آج پھر عورتیں اپنے حق سے محروم کی جا رہی ہیں۔
آج پھر انسانیت سکون تلاش کر رہی ہے۔

—تو سن لیجیے
آج اگر کوئی شخص سکون چاہتا ہے، تو اسے سیرتِ محمدی ﷺ اپنانی ہوگی۔
آج اگر کوئی قوم دنیا و آخرت دونوں کی ترقی چاہتی ہے، تو اسے پیغمبر اسلام ﷺ کی تعلیمات پر عمل کرنا ہوگا۔
آج اگر انسانیت امن چاہتی ہے، تو اسے قرآن اور سیرت کی طرف لوٹنا ہوگا۔

کیونکہ سکون، ترقی اور نجات کا دروازہ صرف اور صرف نبی کی تعلیمات ہی سے کھلتا ہے۔

!عزیز سامعینِ کرام
آمدِ رسول ﷺ انسانیت کے لیے نئی صبح ہے۔
آمدِ رسول ﷺ جہالت کے اندھیروں میں روشنی ہے۔
آمدِ رسول ﷺ برابری اور انصاف کا پیغام ہے۔
آمدِ رسول ﷺ رحمتُ للعالمین ﷺ کا سب سے بڑا احسانِ عظیم ہے۔

!محترم حاضرین
آج اگر ہم سچ میں آمدِ رسول ﷺ کا حق ادا کرنا چاہتے ہیں تو ہمیں صرف جشن و نعت تک محدود نہ رہنا چاہیے،
بلکہ اپنی زندگی کو نبی کی سیرت کے آئینے میں ڈھالنا ہوگا۔

—آئیے ہم سب یہ عہد کریں
ہم جھوٹ کو چھوڑ دیں گے اور سچ کا دامن تھامیں گے۔
ہم نفرت کے بجائے محبت پھیلائیں گے۔
ہم ظلم کے بجائے انصاف قائم کریں گے۔
ہم اپنی اولاد کو علم اور اخلاق کی دولت دیں گے۔
ہم اپنے کاروبار میں امانت داری اور اپنے تعلقات میں انسانیت کو زندہ رکھیں گے۔

کیونکہ یہی وہ راستہ ہے جو ہمیں رسولِ کریم ﷺ کے قریب لے جاتا ہے۔

:آئیے ہم سب دعا کریں
یا اللہ! ہمیں سیرتِ محمدی ﷺ پر چلنے کی توفیق عطا فرما۔
یا اللہ! ہمارے دلوں کو محبتِ رسول ﷺ سے روشن کر دے۔
یا اللہ! ہمیں قرآن اور سیرت کی روشنی میں زندگی گزارنے والا بنا دے۔
آمین یا رب العالمین۔

🌹 آپ کی سماعتوں کا شکریہ! 🌹

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