Seerat Un Nabi Speech In Hindi | सीरतुन नबी तक़रीर

स्टेज पर Speech देने के लिए School या Madarsa के फंक्शन में हिस्सा लेना ख़ुशी की बात है, लेकिन अक्सर बच्चे मुश्किल Topics पर Speech तैयार करने में परेशान हो जाते हैं। लेकिन आपकी इसी परेशानी को दूर करने के लिए, हम एक बहुत ही आसान और सुलझी हुई तक़रीर लेकर आए हैं।

यह Seerat Un Nabi Speech in Hindi याद करने में बहुत आसान है और सुनने में बेहद उम्दा और दिल को छू लेने वाली है। इसे आप Milad-un-Nabi या किसी भी Program में पेश करके समाँ बाँध सकते हैं, महफ़िल में चार चाँद लगा सकते हैं और ख़ूब सारा Sawab हासिल कर सकते हैं। तो याद करना शुरू करिए…

बिस्मिल्ला हिर् रहमानिर् रहीम

अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन, वस्सलातु वस्सलामु अला रसूलिहिल करीम,

व अला आलिहि वअस हाबिही अज मईन, अम्मा बअ’द

क़ालल लाहु तबारका वतआला फ़िल क़ुर आनिल करीम :

वमा अरसल नाका इल्ला रहमतल लिल आलमीन
“وما أرسلناك إلا رحمةً للعالمين”

तमाम सुनने वालों को

“अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल लाहि व बरकातुह”

मोहतरम हज़िरीन!

571 ईसवी का वो दिन था, जब सरवर-ए-कायनात, अफ़ज़लुल अंबिया, अफ़ज़लुल बशर, ताजदारे ख़तमुन नबूवत, वजहे कायनात, सरकारे दो आलम, हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की इस दुनिया में आमद हुई।

आप ﷺ की आमद के साथ तमाम बुत मुँह के बल गिर पड़े, और हर आग बुझ गई। महबूबे ख़ुदा ﷺ की आमद पर, ज़मीन का कोना-कोना नूर से रोशन हो गया। ज़मीन की गहराइयों से लेकर आसमान की बुलंदियों तक न सिर्फ़ इंसान, बल्कि फ़रिश्ते और तमाम मख़लूक़ात बेसाख़्ता पुकार उठी:

सलाम ऐ आमिना के लाल, 
सलाम ऐ नूर-ए-सुब्हानी,
सलाम ऐ फ़ख्र-ए-मौजूदात,
सलाम ऐ फ़ख्र-ए-इंसानी!

आपके आने से गुलज़ार-ए-हस्ती में रौनक आ गई,
आपके आने से नसीब चमक उठे,
आपके आने से फ़ज़्ल-ए-रहमानी बरस पड़ा,
आपकी आमद पर फूल महक उठे, कलियाँ खिल उठीं, हवाएँ आपके नात गुनगुनाने लगीं।

बादल ने साया किया, दरख़्तों ने सजदा किया, और परिंदों ने अपनी चहक में आपकी तशरीफ़-आवरी का जश्न मनाया।

Seerat Un Nabi Speech In Hindi

अज़ीज़ सामईन-ए-किराम!

जब सरवरे कायनात ﷺ इस दुनिया में तशरीफ़ लाए तो ये सिर्फ़ एक पैदाइश नहीं थी, बल्कि इंसानियत के लिए एक नई सुबह थी।
अल्लाह तआला ने अपने प्यारे हबीब ﷺ को सिर्फ़ पैग़म्बर ही नहीं बनाया, बल्कि तमाम पिछली उम्मतों की खूबियों और अजमतों का निचोड़ भी आप ﷺ की ज़ात में जमा कर दिया।

हाज़िरीने गिरामी!

अब ज़रा गौर कीजिए, अल्लाह ने अपने इस प्यारे नबी ﷺ में कैसी-कैसी खूबियाँ जमा कर दीं।
आप ﷺ की ज़ात में हज़रत आदम की बुज़ुर्गी,
हज़रत हव्वा की नज़ाकत,
हज़रत अय्यूब का सब्र,
हज़रत इब्राहीम और इस्माईल की कुर्बानी,
हज़रत मूसा का जलाल,
हज़रत यूसुफ़ की ख़ूबसूरती,
हज़रत मरियम की पाकदामनी,
हज़रत दाऊद का नग़्मा,
और हज़रत ईसा की मसीहाई

यानि आप ﷺ की ज़ात में सारी नबियों की खूबियों जमा कर दी गयीं |
पिछले हर नबी ने किसी एक सिफ़त और ख़ूबी के ज़रिये इंसानियत की रहनुमाई की, मगर अल्लाह ने अपने हबीब ﷺ में सब खूबियों को जमा करके आपको तमाम जहानों के लिए रहमत बना दिया।

यही वजह है कि अल्लाह तआला ने फ़रमाया:
“وما أرسلناك إلا رحمةً للعالمين”
(और हमने आपको तमाम जहानों के लिए रहमत बना कर भेजा)।

वाक़ई, नबी आए, रसूल आए, और हर तरफ़ फ़िज़ा महक उठी।

उठो ऐ ग़म के मारो,चलो ऐ बे-सहारो,
नवीदे सुनाओ – हुज़ूर आ गए हैं।

और आख़िर में मैं यही अर्ज़ करूगा – अल्लाह तआला हमें सीरत-ए-मुस्तफ़ा ﷺ पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।

 “की मुहम्मद से वफ़ा तू ने तो हम तेरे हैं,
ये जहाँ चीज़ है क्या, लौह-ओ-क़लम तेरे हैं।”

आप सबकी तवज्जो का बहुत-बहुत शुक्रिया।

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بسم اللہ الرحمن الرحیم


الحمد للہ رب العالمین

 والصلٰوة والسلام علی رسولہ الکریم،
وعلیٰ آلہ واصحابہ اجمعین، اما بعد

قال اللہ تبارک و تعالیٰ فی القرآن الکریم:

“وما أرسلناك إلا رحمةً للعالمين”

“تمام سننے والوں کو “السلام علیکم و رحمۃ اللہ و برکاتہ

محترم حاضرین!

571

   عیسوی کا وہ دن تھا، جب سرورِ کائنات، افضل الانبیاء، افضل البشر، تاجدارِ ختمِ نبوت، وجہِ کائنات، سرکارِ دو عالم حضرت محمد مصطفیٰ ﷺ کی اس دنیا میں آمد ہوئی۔

آپ ﷺ کی آمد کے ساتھ تمام بت منہ کے بل گر پڑے، اور ہر آگ بجھ گئی۔ محبوبِ خدا ﷺ کی آمد پر زمین کا کونا کونا نور سے روشن ہو گیا۔ زمین کی گہرائیوں سے لے کر آسمان کی بلندیوں تک نہ صرف انسان، بلکہ فرشتے اور تمام مخلوقات بے ساختہ پکار اٹھیں:

سلام اے آمنہ کے لال، سلام اے نورِ سبحانی،
سلام اے فخرِ موجودات، سلام اے فخرِ انسانی

آپ کے آنے سے گلزارِ ہستی میں رونق آ گئی،
آپ کے آنے سے نصیب چمک اٹھے،
آپ کے آنے سے فضلِ رحمانی برس پڑا،
آپ کی آمد پر پھول مہک اٹھے، کلیاں کھل اٹھیں، ہوائیں آپ کی نعت گنگنانے لگیں۔

بادل نے سایہ کیا، درختوں نے سجدہ کیا،
اور پرندوں نے اپنی چہک میں آپ کی تشریف آوری کا جشن منایا۔

!عزیز سامعینِ کرام

جب سرورِ کائنات ﷺ اس دنیا میں تشریف لائے تو یہ صرف ایک پیدائش نہیں تھی، بلکہ انسانیت کے لیے ایک نئی صبح تھی۔

اللہ تعالیٰ نے اپنے پیارے حبیب ﷺ کو صرف پیغمبر ہی نہیں بنایا، بلکہ تمام پچھلی امتوں کی خوبیوں اور عظمتوں کا نچوڑ بھی آپ ﷺ کی ذات میں جمع کر دیا۔

جنابِ عالی! اب ذرا غور کیجیے، اللہ نے اپنے اس پیارے نبی ﷺ میں کیسی کیسی خوبیاں جمع کر دیں:

آپ ﷺ کی ذات میں حضرت آدمؑ کی بزرگی،
حضرت حواؑ کی نزاکت،
حضرت ایوبؑ کا صبر،
حضرت ابراہیمؑ اور اسماعیلؑ کی قربانی،
حضرت موسیٰؑ کا جلال،
حضرت یوسفؑ کی خوبصورتی،
حضرت مریمؑ کی پاک دامنی،
حضرت داؤدؑ کا نغمہ،
اور حضرت عیسیٰؑ کی مسیحائی،

یعنی آپ ﷺ کی ذات میں تمام نبیوں کی خوبیاں جمع کر دی گئیں۔

پچھلے ہر نبی نے کسی ایک صفت اور خوبی کے ذریعے انسانیت کی رہنمائی کی، مگر اللہ نے اپنے حبیب ﷺ میں سب خوبیوں کو جمع کرکے آپ کو تمام جہانوں کے لیے رحمت بنا دیا۔

یہی وجہ ہے کہ اللہ تعالیٰ نے فرمایا:
“وما أرسلناك إلا رحمةً للعالمين”
(اور ہم نے آپ کو تمام جہانوں کے لیے رحمت بنا کر بھیجا)

واقعی! نبی آئے، رسول آئے، اور ہر طرف فضا مہک اٹھی۔

اٹھو اے غم کے مارو، چلو اے بے سہاروں،
نویدِ سناؤ — حضور آ گئے ہیں۔

اور آخر میں میں یہی عرض کروں گا:
اللہ تعالیٰ ہمیں سیرتِ مصطفیٰ ﷺ پر عمل کرنے کی توفیق عطا فرمائے۔ آمین۔

“کی محمد ﷺ سے وفا تو نے تو ہم تیرے ہیں،
یہ جہاں چیز ہے کیا، لوح و قلم تیرے ہیں۔”

آپ سب کی توجہ کا بہت بہت شکریہ۔

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