अगर मैं आप से पूछूं कि “निकाह क्या है?” (nikah kya hai?) तो यक़ीनन आपके ज़हन में दावत, सजावट (decoration), महमान और तस्वीरें और तरह तरह की रस्में घूमने लगेंगी, है ना! और ऐसा इसलिए होगा क्यूंकि हम बचपन से यही देखते और सुनते आए हैं, लेकिन क्या निकाह सिर्फ़ इसी का नाम है इसकी हक़ीक़त क्या है? |
आज इस Islamic Marriage Guide में हम बिलकुल आसान ज़बान में समझेंगे कि इस्लाम क्यूँ निकाह पर ज़ोर देता है, और मियां-बीवी में वो कौन सी बातें हैं जो इस रिश्ते को बरकत और मोहब्बत से भर देती हैं। वो कौन सा निकाह है जिसको इस्लाम ने इबादत कहा है, तो चलिए! आज deeply बात हो ही जाये कि nikah kya hai?
निकाह का असली मतलब
“निकाह” का लफ़्ज़ सुनने पर, हमारे दिमाग में अक्सर एक काग़ज़, गवाह, क़ाज़ी साहब और “क़बूल है” आता है। लेकिन इस्लाम ने जो निकाह का concept दिया है, वो इससे कहीं ज़्यादा गहरा, नरम और रूहानी है।
अरबी ज़बान में भले ही निकाह को क़रार (agreement) कहा गया हो, लेकिन इस्लाम की नज़रों में निकाह सिर्फ़ कोई deal या contract नहीं है। बल्कि निकाह का मतलब है
- दो दिलों का इकरार,
- दो रूहों का मिलना,
- और दो ज़िम्मेदारियों का एक रास्ते पर चल पड़ना।
इस्लाम कहता है कि जब एक लड़का और लड़की कहते हैं “क़बूल है”, तो वो सिर्फ़ एक-दूसरे को नहीं, बल्कि अल्लाह को गवाह बना कर वादा करते हैं कि:
- हम एक-दूसरे को इज़्ज़त देंगे
- एक-दूसरे का सहारा बनेंगे
- मोहब्बत और रहमत के साथ ज़िन्दगी गुज़ारेंगे
- और हर मुश्किल में एक-दूसरे के लिए खड़े रहेंगे
यानी निकाह ज़िन्दगी बाँटने का वादा है, न कि सिर्फ़ घर बाँटने का।
Qur’an में अल्लाह तआला फ़रमाता है:
“ताकि तुम उनसे सुकून पाओ, और उसने तुम्हारे दरमियान मोहब्बत और रहमत पैदा कर दी।”
सूरह अर-रूम, 30:21
इस एक आयत में निकाह की पूरी फिलॉसफी है: शादी सुकून के लिए है, और निकाह में मोहब्बत और रहमत अल्लाह की तरफ़ से उतरती है, यही वजह है कि निकाह का वादा दुनिया के हर वादे से अलग है। क्यूँकि ये दिलों में की गई बात नहीं ये रूहों में लिखा हुआ pact (वादे का नक़्श) है।
निकाह: सिर्फ़ रस्म नहीं, एक रूहानी सफ़र
अक्सर लोग समझते हैं कि निकाह बस एक दिन का function (दावत/प्रोग्राम) है, जिसमे सजावट, महमान, photos, वीडियो… और बस, लेकिन इस्लाम का नज़रिया इससे बिलकुल अलग है। वो ये कि निकाह दरअसल एक रूहानी सफ़र की शुरुआत है, एक ऐसा सफ़र जिसमें दो लोग एक-दूसरे के लिए सिर्फ़ partner नहीं बल्कि रहमत का ज़रिया बनते हैं।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
“निकाह मेरी सुन्नत है, और जो मेरी सुन्नत से रुख़ फेर ले, वह मुझमें से नहीं।”
ज़रा सोचिये…कि किसी अमल को नबी ﷺ अपनी सुन्नत कहें, और उस पर ज़ोर भी दें तो उसके पीछे कितनी बरकत और क्या क्या हिकमतें छुपी होंगीं |
दूसरी हदीस में आया है:
“जब इंसान निकाह कर लेता है, वह अपने दीन को मुकम्मल कर लेता है।”
लेकिन सवाल यह है कि निकाह दीन को मुकम्मल कैसे करता है?जवाब है क्यूँकि:
- यह इंसान को बुराइयों से बचाता है
- नफ़्स (self-desire) को क़ाबू करना सिखाता है
- ज़िन्दगी में तवाज़ुन (balance) लाता है
- रिश्ते में सुकून लाता है
- जहाँ तक मेरा तजुरबा है कि इन्सान को ख़याली ज़िन्दगी से निकाल कर हक़ीक़त की दुनिया में लाता है
निकाह का सफ़र दो रूहों की इबादत है, इसमें हर छोटी चीज़ जैसे खयाल रखना, मोहब्बत देना, गलतियों को माफ़ करना, सब अल्लाह के यहाँ लिखी जाती है। इसलिए इस्लाम के नज़रिए में निकाह सिर्फ़ शादी नहीं है… बल्कि ये एक मुक़द्दस journey (मुक़द्दस सफ़र) है, जहाँ दोनों मिलकर दीन, दुनिया और दिल, तीनों को सँवारते हैं।
निकाह की 10 सच्चाइयाँ आपकी सोच बदल देंगी
निकाह: मोहब्बत और एहसास का रिश्ता
इस्लाम ने मियां–बीवी के रिश्ते को सिर्फ़ “क़ानूनी बंधन” नहीं कहा है, बल्कि बताया कि ये ऐसा रिश्ता है जिसमें मोहब्बत, रहमत, एहसास, और दिल की नरमी एक साथ बहती है। और Qur’an इस रिश्ते को एक बेहद खूबसूरत पैराए में ढालता है:
“वे तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए लिबास हो।”
सूरह अल-बक़रह 2:187
ज़रा इस एक लफ्ज़ “लिबास (कपड़ा/ढाल)” पर गौर करें… कि लिबास क्या करता है?
- वो गर्मी–सर्दी से बचाता है
- कमियों को छुपाता है
- इंसान की शख़्सियत को ख़ूबसूरत बनाता है
- हर वक़्त सबसे करीब होता है
यानि मियां–बीवी एक-दूसरे के सहारा भी हैं, एक दुसरे को ज़माने की सर्दी और गर्मी से बचाते भी हैं, और एक-दूसरे के हिफ़ाज़ती लिबास भी हैं, और एक दूसरे के इतने क़रीब होते हैं, जितना लिबास जिस्म के क़रीब होता है, और असली निकाह वहां शुरू होता है, जहाँ दो लोग एक-दूसरे को सिर्फ़ पसंद नहीं करते, बल्कि एक-दूसरे की थकान समझते हैं, कमज़ोरियों को ढाँपते हैं, और गलतियों को माफ़ करके उसे दूसरों से छुपाते हुए प्यार देते हैं।
निकाह में romance
निकाह में मोहब्बत सिर्फ़ romance नहीं होती, बल्कि मुहब्बत तो वो है जब दोनों एक-दूसरे का कंधा बनें, एक-दूसरे की दुआ बनें, और एक-दूसरे की रहमत बन जाएँ। इसलिए इस्लाम में शादी “इश्क़ का contract” नहीं…बल्कि एहसास का रिश्ता है, जहाँ हर दिन मोहब्बत थोड़ी लेकिन गहरी होती है, और हर रात दुआ थोड़ी लेकिन सच्ची होती है|
निकाह की तैयारी: 5 ज़रूरी और बरकत वाली बातें
निकाह करना आसान है… लेकिन बरकत वाले निकाह में समझदारी और अच्छी नियत होनी बहुत ज़रूरी है, अक्सर लोग शादी के दिन को तो बहुत बड़ा बना देते हैं, लेकिन रिश्ता छोटा रह जाता है। जबकि इस्लाम हमें सिखाता है, शादी का दिन सादा हो, लेकिन रिश्ता बरकत वाला हो।
यहाँ पाँच reminders हैं जो किसी भी निकाह को खूबसूरत, आसान, और अल्लाह की रहमतों से भरपूर बना देते हैं।
1. निकाह को सादा रखें, सादगी में ही बरकत है
हमारी society का सबसे बड़ा मसला यह है कि लोग शादी को एक competition (मुक़ाबला) समझ लेते हैं। फलाँ की शादी ऐसी थी, तो हमारी उससे बड़ी होनी चाहिए। लेकिन ये सब करने से पहले ये ध्यान रखें कि फुज़ूलखर्ची बरकत को खा जाती है। इसलिए किसी के चक्कर में पड़कर आप अपना मक़ाम अल्लाह की नज़र में न गिराएँ|
और चूंकि रसूलुल्लाह ﷺ ने सादगी को पसंद किया…और simplicity (सादगी) रिश्ते को हल्का, आरामदेह और तनाव-मुक्त बनाती है। इसलिए सादगी को चुनें और निकाह को जितना आसान करेंगे उतनी रहमत, उतनी खुशी, उतना सुकून अपने आप उतरता चला जाएगा।
2. मुवाफ़िक़त (compatibility) देखें – सिर्फ़ शक्ल और तन्ख्वाह नहीं
अक्सर लोग निकाह के लिए बस यही देखते हैं: लड़की खूबसूरत है? लड़का कमाता कितना है? लेकिन शादी सिर्फ़ इन दो चीज़ों पर नहीं चलती। क्यूंकि असल compatibility यह है कि:
- उनकी सोच मिलती हो
- दीन के मामले में मजबूत हों
- lifestyle match करता हो
- अख़लाक़ अच्छे हों
अगर सोचें दो अलग दिशाओं में हों, एक पूरब की तरफ़, एक पश्चिम की तरफ़, तो ज़िन्दगी का ये सफ़र मुश्किल हो जाता है। इसलिए निकाह से पहले looks या salary से ज़्यादा, values और akhlaq पर ध्यान दें। यही चीज़ें ज़िन्दगी आसान बनाती हैं।
3. हक़ूक़ और फ़राइज़ जानें – rights और responsibilities समझें
इस्लाम ने मियां और बीवी दोनों के हक़ (rights) और ज़िम्मेदारियों (responsibilities) को बहुत प्यार से explain किया है। और बताया है कि रिश्ता तब खूबसूरत होता है जब दोनों ये न सोचें:
“मुझे क्या मिल रहा है?” बल्कि ये सोचें:
“मैं अपने साथी के लिए क्या कर सकता हूँ?”
जब husband अपनी बीवी के लिए आसानी पैदा करे, और wife अपने शौहर के लिए सुकून तब nikah सिर्फ़ निकाह नहीं रहता बल्कि इबादत बन जाता है।
4. एक-दूसरे के लिए दुआ करें – दुआ रिश्तों को जोड़ती है
दुआ एक बहुत ही powerful हथियार है लेकिन शायद लोग इसे underestimate कर देते हैं और उन्हें नहीं पता कि दुआ हमारे रिश्तों को बेहतर रखने में कितना रोल अदा करती है । जब आप अपने हमसफ़र की खुशी, ईमान, रिज़्क़ और भलाई के लिए दुआ करते हैं, तो अल्लाह इस रिश्ते में रहमतों और बरकतों को बढ़ा देते हैं, और दुआ वो चीज़ है जो दिलों को नरम कर देती है, ग़ुस्से को पिघला देती है, और मोहब्बत को और गहरा कर देती है।
5. एक-दूसरे के राज़ और कमियों की हिफ़ाज़त – यही है असली निकाह
इस्लाम का concept बेहद खूबसूरत है: “मियां–बीवी एक-दूसरे का लिबास हैं।” इसका मतलब:
- एक-दूसरे को दुनिया की बुरी नज़र से बचाना
- कमियों को छुपाना
- राज़ों की हिफ़ाज़त करना
- और एक-दूसरे को शर्मिंदगी से बचाना
ग़ुस्से में, नाराज़गी में, बहस में या किसी भी हालत में, कभी भी एक-दूसरे की कमज़ोरियाँ दुनिया के सामने न लाएँ। जो घर के अंदर है, उसे घर में ही रहने दें। और आपकी यह habit शैतान का मुंह काला करती है और रिश्तों में सुकून मुहब्बत लाती है, क्यूंकि शैतान कभी नहीं चाहता दोनों की ज़िन्दगी में और सुकून रहे |
दुनिया का कोई भी मुल्क हो: निकाह का पैग़ाम हर जगह एक जैसा
आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएँ, India, Pakistan, Saudi, Africa, Europe, America… निकाह का पैग़ाम हर जगह एक जैसा मिलेगा और निकाह की असल रूह हर जगह एक जैसी मिलेगी। आप देखेंगे कि शादी की सजावट बदल सकती है, रिवाज़ बदल सकते हैं, dress और culture बदल सकता है, लेकिन निकाह का पैग़ाम नहीं बदलता। ऐसा इसलिए क्यूंकि इस्लाम दुनिया को एक बहुत सीधा, सच्चा और खूबसूरत message देता है:
मोहब्बत + रहमत + ज़िम्मेदारी = निकाह
यह formula हर जगह एक जैसा है। कोई भी society हो, कोई भी language हो, जब दो लोग अल्लाह को गवाह बनाकर एक-दूसरे की ज़िम्मेदारी लेते हैं, तो वो रिश्ता एक ही तरह की बरकत और रहमत लेकर आता है।
लेकिन एक बात याद रखें!
निकाह perfect ज़िन्दगी का वादा नहीं करता,
लेकिन perfect रास्ता ज़रूर देता है।
क्योंकि ज़िन्दगी में:
- कभी ख़ुशियाँ होंगी
- कभी आँसू
- कभी इम्तिहान (challenges) आएँगे
- और कभी राहत (relief) भी
लेकिन जब रिश्ता निकाह की नींव पर खड़ा हो, तो हर मोड़ पर अल्लाह की रहमत साथ चलती है। यही वजह है कि निकाह दुनिया का सबसे खूबसूरत, और सबसे बरकत वाला बंधन माना जाता है।
आख़िरी बात: निकाह, अल्लाह की सबसे खूबसूरत नेअमत
निकाह कोई एक दिन का function (दावत/celebration) नहीं…यह तो एक नेअमत है, ऐसी नेअमत जिसकी क़द्र भी करनी होती है और इस्लाम ने हमें यह सिखाया है कि:
- निकाह दिलों का सुकून है।
- निकाह घर की बरकत है।
- निकाह इबादत का रास्ता है।
- और निकाह दो रूहों का मिलकर आगे बढ़ने का सफ़र है।
जब दो लोग एक-दूसरे का हाथ थामकर अल्लाह के नाम से ज़िन्दगी की शुरुआत करते हैं, तो उस सफ़र में
- कभी खुशी होती है,
- कभी आँसू,
- कभी इम्तिहान,
- कभी राहत…
लेकिन हर हाल में अल्लाह की रहमत उनके साथ चलती है। अल्लाह तआला हर मुस्लिम जोड़े के निकाह में सुकून, मोहब्बत, रहमत, और बरकत नाज़िल फ़रमाए—आमीन।
निकाह से जुड़े सवालात
1. इस्लाम में निकाह को इतना अहम क्यूँ माना गया है?
क्योंकि निकाह सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं बल्कि एक इबादत है। इसके ज़रिये दो लोग मोहब्बत, रहमत और ज़िम्मेदारी के साथ ज़िन्दगी गुज़ारने का वादा करते हैं। Qur’an भी कहता है कि शादी में “सुकून और रहमत” डालना अल्लाह की निशानियों में से है।
3. निकाह में सादगी क्यों ज़रूरी है?
क्योंकि फुज़ूलखर्ची बरकत को खत्म कर देती है। रसूलुल्लाह ﷺ ने हमेशा simple निकाह को पसंद किया।और सादगी वाले निकाह में: कम तनाव, कम दिखावा, ज़्यादा बरकत, ज़्यादा सुकून होता है।
4. Islam के हिसाब से सही life partner कैसे चुना जाए?
Look और income से ज़्यादा important है: Akhlaaq (चरित्र), Deen (मज़हबी level), सोचना और lifestyle, हम-आहंगी (compatibility)- यही चीज़ें शादी को लंबे वक़्त तक खूबसूरत बनाती हैं।
5. मियां–बीवी के हक़ूक़ और फ़राइज़ जानना क्यों ज़रूरी है
क्योंकि rights और responsibilities समझकर रिश्ता आसान और मोहब्बत से भरपूर हो जाता है, इस्लाम चाहता है कि husband और wife दोनों एक-दूसरे के लिए सुकून का ज़रिया बनें।
6. क्या दुआ सच में रिश्तों को बदल देती है?
जी हाँ, दुआ दिलों को नरम करती है, ग़ुस्से को पिघला देती है और मोहब्बत गहरी कर देती है। जो जोड़ा एक-दूसरे के लिए दुआ करता है, उनके घरों पर रहमत उतरती है।
7. “लिबास” वाली आयत का असली मतलब क्या है?
Qur’an कहता है: “वे तुम्हारे लिए लिबास हैं और तुम उनके लिए लिबास।”
लिबास की मिसाल इसलिए दी क्यूंकि “लिबास” कमियों को छुपाता है, हिफ़ाज़त करता है, इंसान को खूबसूरत बनाता है, सबसे करीब होता है, यानि मियां–बीवी एक-दूसरे के लिए यही काम करते हैं, हिफ़ाज़त, करीबी सहारा और कमियों को छुपाना है।
8. क्या निकाह perfect रिश्ते की guarantee देता है?
नहीं, perfect रिश्ते इंसान नहीं बनाते, नियत बनाती है। निकाह आपको perfect रास्ता देता है जिस पर चलकर आप एक खूबसूरत, बरकत वाली ज़िन्दगी बना सकते हैं।