कभी ऐसा होता है कि दिल घबराया हुआ है, वजह साफ़ नहीं…डर है, बेचैनी है, कोई अनदेखा सा ख़तरा महसूस हो रहा है। और इन ख़तरों में नज़र भी है, हसद भी, अंधेरा भी, और ऐसी ताक़तें भी हैं जिन्हें हम देख नहीं पाते, और ये हमें नुक़सान पहुंचा देती हैं, लेकिन डरने की बात नहीं, क्यूंकि अल्लाह हमें एक छोटा सा, मगर बहुत गहरा हथियार देता है वो है सूरह अल-फ़लक़ |
यह सूरह हमें बताती है कि जब दुनिया की सारी हिफ़ाज़तें और Protection नाकाफ़ी लगें, तब तुम्हें असली पनाह और हिफ़ाज़त कहाँ मिलेगी। तो चलिए, आज हम Surah Al-Falaq In Hindi Translation पेश करेंगे जिससे आपको पता चलेगा कि अल्लाह तआला ने इसमें क्या पैग़ाम दिया है |
Surah Al-Falaq क्यूँ नाज़िल हुई? शाने नुज़ूल
रिवायतों के मुताबिक़ जब यहूदियों ने नबी करीम ﷺ पर जादू किया, तो उसका असर ये हुआ कि आप को जिस्मानी तौर पर बोझ, दिल में बेचैनी और कमज़ोरी महसूस होने लगी। तभी अल्लाह तआला ने जिब्रील अमीन को भेजा और सूरह अल-फ़लक़ और सूरह अन-नास नाज़िल हुईं।
और जैसे-जैसे आयतें पढ़ी गईं, गिरहें खुलती गईं…और नबी करीम ﷺ को शिफ़ा मिलती गई। इसके बाद नबी (सल्लल लाहू अलैहि वसल्लम) ने ऐसी राहत महसूस की, जैसे कोई रस्सी से बंधा हुआ शख्स आज़ाद हो गया हो।
तो अब आप सोचिए! जब यह सूरह नबी (सल्ल.) को शिफा दे सकती है, तो क्या हमारी परेशानियाँ कुछ अलग हैं? तो चलिए इस सूरह के डीप में जाकर समझते हैं |

आपने सूरह नास पढ़ी होगी उसमें भी अल्लाह की पनाह में आने की बात की गयी है, तो वैसे ही यहाँ पर भी अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि पनाह में आ जाओ “रब्बुल-फलक” की, तो यहाँ बात समझ में नहीं आई कि रब्बुल-फलक” की पनाह में आ जाओ रब का मतलब तो जनता हूँ ये फ़लक क्या होता है|
तो ‘फलक’ का मतलब होता है किसी चीज़ को चीर कर निकलना। जैसे रात के गहरे अंधेरे को चीर कर सुबह की रोशनी निकलती है, या जैसे सख़्त ज़मीन को चीर कर एक नन्हा सा बीज बाहर आता है। ठीक उसी तरह यहाँ अल्लाह तआला हमें पैगाम दे रहा है:
“ऐ मेरे बन्दे! अगर मैं काली रात का सीना चीर कर सूरज निकाल सकता हूँ, तो मैं तेरी मुश्किलों के अंधेरे चीर कर तेरे लिए आसानी भी निकाल सकता हूँ।” और जिस तरह मैं रात को चीर कर दिन लाता हूँ, उसी तरह मैं तुम्हारे डर, जादू, हसद, और बुराई को भी चीर सकता हूँ।
इसीलिए यहाँ अल्लाह ने अपना नाम “रब्बुल-फलक” (सुबह का रब) चुना। और बताया कि पनाह किसी चीज़ से नहीं, किसी ताबीज़ से नहीं, किसी इंसान से नहीं, बल्कि उस रब से माँगो जो अंधेरे को भी उजाले में बदल देता है।
तो आज सोने से पहले,आँख बंद करके दिल से कहिए: “या अल्लाह! मैं तेरे फ़लक़ की पनाह में आता हूँ।”

कभी-कभी डर सिर्फ़ एक चीज़ से नहीं होता…बल्कि हर तरफ़ से होता है। लोग, हालात, हादसे, बीमारी, नुकसान में घिरकर इंसान सोचता है: “आख़िर किस-किस से बचूँ?” आयत का यह हिस्सा इसी का जवाब दे रहा है। वो ये कि चारों तरफ़ घिरे हुए इन्सान से अल्लाह कह रहा है: “जो कुछ भी बुराई दुनिया में मौजूद है, उसकी बुराई से मेरी पनाह माँगो। और मेरे साये तले आ जाओ|
गौर कीजिये! अल्लाह यह नहीं कह रहा कि सारी मख़लूक़ बुरी है, बल्कि यह है कि मख़लूक़ से बुराई पैदा हो सकती है। दुनिया में कोई चीज़ अपने आप में ख़तरनाक नहीं होती वो ख़तरा तब बनती है जब वह अल्लाह की हद से बाहर आ जाये।
- इंसान — ज़ालिम बन सकता है
- दौलत — फ़ितना बन सकती है
- इल्म — घमंड बन सकता है
- ताक़त — ज़ुल्म बन सकती है
इसीलिए अल्लाह हमें सिखाता है: “हर मख़लूक़ से डरने की ज़रूरत नहीं, बल्कि मख़लूक़ जब बुराई करने पर उतर आये तो उससे मेरी पनाह माँगो।” यह एक जनरल प्रोटेक्शन है, जो दिखाई देने वाली और न दिखाई देने वाली हर बुराई को कवर करती है। तो आज एक आदत बनाइए: जब भी दिल घबराए, कहिए: “या अल्लाह! हर उस चीज़ की बुराई से बचा जो तूने पैदा की।”
अब आने वाली 3 आयतों में 3 ऐसे ख़तरों से आगाह किया गया है जो अक्सर हमें दिखाई तो नहीं देते, लेकिन हमारी ज़िन्दगी तबाह कर सकते हैं। और उन्ही चीज़ों से बचने के लिए यहाँ पर पर अल्लाह ने पनाह मांगने की बात की है | और वो 3 ख़तरे ये हैं …
पहला खतरा: रात का अंधेरा (Darkness)

दिन में इंसान खुद को मज़बूत समझता है, लोग होते हैं, शोर होता है, रोशनी होती है, लेकिन जैसे ही रात उतरती है… दिल अजीब सा हो जाता है और डर बिना दस्तक दिए आ जाता है।
क्यूंकि रात सिर्फ़ अंधेरा नहीं लाती, बल्कि खौफ़ को भी आज़ाद कर देती है। चोर रात में निकलते हैं, गुनाह रात में बढ़ते हैं, शैतानी वसवसे रात में तेज़ हो जाते हैं,। तो यह आयत हमें बताती है कि: हर अंधेरा ख़तरनाक नहीं होता, मगर जब अंधेरा पूरी तरह छा जाए, तब ख़तरा बढ़ जाता है।
“ग़ासिक़” — वह अंधेरा जो ठहर जाए
“वक़ब” — जो घुस जाए, फैल जाए
इस आयत में अल्लाह हमें सिखाता है: कि अंधेरी रात में होने वाली बुराई के नुक़सान से मेरी पनाह माँगा करो, मेरी हिफ़ाज़त में आ जाया करो ताकि वो बुराई तुम तक न पहुँच सके |
दूसरा खतरा: जादू और साज़िशें (Magic & Plotting)

कभी-कभी नुक़सान सामने से नहीं आता…वह चुपके से, छुपकर, बिना आवाज़ के आता है। कोई सामने दुश्मन नहीं होता,फिर भी ज़िंदगी उलझती चली जाती है।जिसके पीछे ऐसी बुराइयाँ होती हैं जो नज़र नहीं आतीं, मगर असर बहुत गहरा छोड़ जाती हैं।
पुराने वक़्त में जादू करने वाले रस्सी में गिरह (गाँठ) लगा कर उस पर फूँक मारते थे। लेकिन इसका एक और गहरा मतलब है। ‘गिरह में फूँकना’ उन लोगों की तरफ भी इशारा है जो रिश्तों की मज़बूत गिरह (bonds) को कमज़ोर करते हैं।
वो लोग जो दो दोस्तों या मियाँ-बीवी के बीच ऐसी बातें (फूँक) डालते हैं कि उनका रिश्ता टूट जाए। यह एक तरह की ‘दिमागी जंग’ है। चाहे वो काला जादू हो या किसी की ज़हरीली बातें, दोनों से बचने का रास्ता सिर्फ़ अल्लाह की पनाह है।
इस आयत में अल्लाह साफ़ बता रहा है कि: जादू एक हक़ीक़त है, मगर उससे डरने से ज़्यादा ज़रूरी है अल्लाह की पनाह। तो हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद कहिए: “या अल्लाह! हर छुपी हुई साज़िश से मेरी हिफ़ाज़त फरमा।”
तीसरा खतरा: हसद (Jealousy / जलन )
कभी आपने महसूस किया है आप ठीक चल रहे थे,सब कुछ बेहतर हो रहा था,और अचानक…सब उलट-पुलट? न कोई दुश्मनी, न कोई झगड़ा, फिर भी दिल भारी, रास्ते बंद। अक्सर इसके पीछे एक आग होती है, वो है हसद की आग।

हसद ((Jealousy) क्या है?
मिसाल के तौर पर, एक इंसान है अल्लाह ने उसे कुछ नेमतें और कामयाबी दी हैं, तो उसको कोई दूसरा देखता है तो उसके दिल में आता है कि ये नेमत मेरे पास आये न आये लेकिन इससे छिन जाए। यही है हसद। यही है जलन, ख़ामोश… मगर बेहद ज़हरीला।
हसद (Jealousy) वो आग है जो दिखती नहीं, लेकिन सब कुछ जला देती है। जब कोई आपकी खुशी, आपकी तरक्की, या आपकी मुस्कुराहट देख कर अन्दर ही अन्दर जलने लगे और चाहे कि आप से यह चीज़ छिन जाए, यह हसद है।
हालाँकि ये भी हक़ीक़त है कि हसद करने वाला सबसे पहले अपना नुकसान करता है, लेकिन उसकी “नज़र” (Evil Eye) दूसरे को तबाह कर सकती है। अब हमें नहीं पता कौन हमारा दोस्त है और कौन अन्दर से जल रहा है। इसलिए हम रब से कहते हैं: “या अल्लाह! मैं उन दुश्मनों को नहीं जानता, पर तू जानता है। मुझे उनकी बुरी नज़र से बचा ले।”
इस सूरह से हम ने क्या सीखा?
| अल्लाह ‘अल-फ़ालिक’ है: | कोई परेशानी परमानेंट (हमेशा रहने वाली) नहीं है। अल्लाह हर मुश्किल को चीर कर राहत लाने वाला है। |
| इलाज से बेहतर परहेज़ है (Prevention is better than Cure): | हम बीमार होने के बाद दवा खाते हैं, लेकिन यह सूरह “वैक्सीन” है। मुसीबत आने से पहले ही अल्लाह की प्रोटेक्शन (हिफ़ाज़त) माँग लो। |
| छुपे हुए दुश्मन: | हमारे सबसे बड़े दुश्मन अक्सर छुपे हुए होते हैं (रात, जादू, हसद)। इनसे हम अपनी ताक़त से नहीं लड़ सकते, सिर्फ़ अल्लाह की ताक़त ही हमें बचा सकती है। |
| अल्लाह की पनाह में आना: | यह सूरह बताती है: दुनिया में अंधेरे भी हैं, जादू भी है, हसद भी है, मगर इन सबसे बड़ी एक हक़ीक़त है अल्लाह की पनाह। जो इस पनाह में आ गया, वह महफ़ूज़ हो गया। |
ज़िन्दगी में अमल (Life Application)
आज से एक वादा करें: जब भी सुबह हो, तो रब्बुल-फलक को याद करें कि जिसने नयी सुबह दी है, वो आज के दिन मेरी हिफ़ाज़त भी करेगा। जब भी रात हो, तो सोने से पहले अपने हाथों को उठायें, और सूरह फलक और नास पढ़ कर अपने हाथों पर फूँकें और पूरे जिस्म पर फेर लें। (यह सुन्नत तरीक़ा है)।
यह सूरह आपको यह यक़ीन दिलाती है कि दुनिया चाहे कितनी भी खतरनाक हो, आपका रब उससे कहीं ज़्यादा ताक़तवर है। तो “डर को दिल से निकाल दें, क्योंकि आप ‘सुबह के रब’ की पनाह में हैं।”