Top 20 Hadees Quotes In Hindi With Translation | Part 2

Top 20 Hadees Quotes In Hindi With Translation : आपने देखा होगा कि इस ज़माने में भलाई और बुराई में फ़र्क़ तक़रीबन मिट ही गया है, एक तरफ़ हलाल पर चलना मुश्किल हो गया है तो दूसरी तरफ़ हराम बिलकुल आम हो गया है और इन हालात में पड़ कर एक सच्चा इन्सान कब बुराई और गुनाह की दलदल में चला गया उसको अहसास भी नहीं होता |

और इसकी वजह होती है कम इल्म होना या न जानना, तो अगर आप अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाना चाहते हैं, अपने अख़लाक़ को सुधारना चाहते हैं और रोज़मर्रा के मसलों में सही रास्ता पाना चाहते हैं, तो हदीस से बेहतर कोई रहनुमाई नहीं हो सकती।

हमारे नबी ﷺ की बातें न सिर्फ उस दौर के लिए, बल्कि आज के हर इंसान के लिए एक पूरी गाइडलाइन हैं। तो इसीलिए आज इस पोस्ट “Top 20 Hadees Quotes In Hindi With Translation में हमने ऐसी चुनिंदा और छोटी-छोटी हदीसें शामिल की हैं, जो पढ़ने में आसान हैं लेकिन असर में बहुत गहरी हैं। हर हदीस के साथ उसका आसान हिंदी मतलब भी दिया गया है, ताकि आप सिर्फ पढ़ें ही नहीं, बल्कि समझें और अपनी ज़िंदगी में लागू भी कर सकें।

नबी ﷺ ने फरमाया:
"सबसे अच्छा मुसलमान वह है जिसकी ज़ुबान और हाथ से दूसरे मुसलमान सुरक्षित रहें।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 10

ये हदीस बताती है कि एक बेहतरीन और अच्छा मुसलमान वह नहीं जो सिर्फ इबादत करे और तस्बीह पढ़े, बल्कि वह है जिसकी ज़ुबान और हाथ से लोग महफूज़ रहें। अगर हमारी ज़ुबान से किसी का दिल दुखता है या हाथ से किसी को नुकसान पहुँचता है, तो हमारी इबादत अधूरी है। और हदीस के मुताबिक़ वो अच्छे और नेक मुसलमानो की लिस्ट में नहीं आता है इसलिए ज़रूरी है कि अपनी जानिब से किसी को तकलीफ़ न पहुँचने दें ये चीज़ अल्लाह और उसके रसूल को न पसन्द है |

Top 20 Hadees Quotes In Hindi With Translation
नबी ﷺ ने फरमाया:
"ताकतवर वह नहीं जो कुश्ती में जीत जाए, बल्कि ताकतवर वह है जो गुस्से के समय अपने आप पर काबू रखे।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 6114

इस हदीस से हमें पता चलता है कि असली ताकत वर वो नहीं जिसका जिस्म मज़बूत हो बल्कि ताक़तवर तो वो है, जिसका दिल और दिमाग मज़बूत हो । क्यूंकि गुस्से में इंसान कुछ भी गलत बोल सकता है या कर सकता है, और इस ग़ुस्से से कभी ख़ुद को और दूसरे को तकलीफ़ पहुंचा सकता है लेकिन जो उस वक्त खुद को कंट्रोल कर ले, वही असली बहादुर है। ये बात हदीस में इसलिए कही गयी है क्यूंकि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में छोटे-छोटे झगड़ों में अगर हम खुद को रोक लें, तो बहुत बड़े नुकसान से बच सकते हैं।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"अपने भाई के सामने मुस्कुराना भी सदक़ा है।"

जामिअ तिर्मिज़ी, हदीस नं. 1956

इस हदीस का मतलब यह है कि इस्लाम इतना आसान और खूबसूरत दीन है। कि यहाँ सिर्फ मुस्कुराना भी इबादत माना जाता है। और इस्लाम की मान्यता है कि जब आप किसी से हँसकर और मुस्कुरा कर मिलते हैं, तो इससे सदक़े का सवाब मिलता है और ज़ाहिर है कि जब सामने वाले का दिल खुश होता है तो रिश्ते मजबूत होते हैं। इसलिए सबसे मुस्कुरा कर मिलिए क्यूंकि आज की टेंशन भरी ज़िंदगी में आपकी एक मुस्कान किसी का दिन बेहतर बना सकती है।

नबी ﷺ ने फरमाया:
"जो व्यक्ति इल्म हासिल करने के रास्ते पर चलता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देता है।"

सहीह मुस्लिम, हदीस नं. 2699

इस हदीस में बताया गया है कि सीखना, konwledge हासिल करना बहुत ज़रूरी है, क्यूंकि इस्लाम में इल्म की बहुत अहमियत बताई गई है। तो जो इंसान इल्म सीखने के लिए मेहनत करता है, तो अल्लाह उसके लिए जन्नत का रास्ता आसान कर देता है। इसका मतलब साफ़ है कि पढ़ाई सिर्फ दुनिया के लिए नहीं, बल्कि आख़िरत के लिए भी फायदेमंद है। बस वो इल्म सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए नहीं बल्कि अपने साथ साथ सारी इंसानियत के फ़ायदे के लिए हो इसलिए हर उम्र में सीखते रहना बहुत जरूरी है।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"तुम में सबसे बेहतर वह है जिसके अख़लाक़ सबसे अच्छे हों।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 3559

इस हदीस से पता चलता है कि इंसान की असली पहचान उसका व्यवहार उसके अच्छे अख़्लाक़ हैं। क्यूंकि बुरे अख़्लाक़ वाला न तो लोगों के दिलों में जगह बना सकता है और न अल्लाह और उसके रसूल उसको पसंद करते हैं और अच्छे अख़लाक़ का मतलब है लोगों से प्यार, इज्ज़त और नरमी से पेश आना। अगर किसी के पास बहुत इल्म, दौलत, शोहरत सब है लेकिन उसका व्यवहार खराब है। तो उसके बुरे अख़्लाक़ से घर वालों और बाहर वालों सब को तकलीफ़ पहुँचेगी, इसलिए कैरेक्टर और अख़्लाक़ सबसे ज्यादा अहम है।

नबी ﷺ ने फरमाया:
"सच्चाई नेकी की तरफ ले जाती है और नेकी जन्नत की तरफ ले जाती है।"

सहीह मुस्लिम, हदीस नं. 2607

यह हदीस हमें बताती है कि सच बोलना सिर्फ एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि जन्नत तक पहुँचने का रास्ता भी है। और हदीसों में ये भी आया है कि मुसलमान के अंदर दूसरी गलतियाँ आ सकती हैं लेकिन झूट उसके अंदर नहीं आ सकता क्यूंकि जब इंसान हमेशा सच्चाई अपनाता है, तो धीरे-धीरे वह नेक कामों की तरफ बढ़ता है, और सच्चाई से लोगों में भरोसा बनता है और उसकी इज्ज़त भी बढ़ती है।

नबी ﷺ ने फरमाया:
"झूठ गुनाह की तरफ ले जाता है और गुनाह जहन्नम की तरफ ले जाता है।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 6094

इस हदीस बता रही है कि झूठ शुरू में कितना ही आसान और अच्छा रास्ता क्यूँ न लगे आख़िर में उसका अन्जाम खतरनाक ही होता है। जब इंसान एक झूठ बोलता है तो धीरे धीरे और झूठ बोलने पड़ते हैं और इस तरह धीरे-धीरे वह गुनाहों में फंस जाता है। और गुनाह का रास्ताआखिरकार जहन्नम की तरफ ले जाता है। इसलिए छोटी-छोटी बातों में भी झूठ से बचना बहुत जरूरी है।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"अल्लाह नरम है और हर काम में नरमी को पसंद करता है।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 6927

यह हदीस सिखाती है कि लोगों से नरमी से पेश आना, नर्म लहजा रखना इन्सान के अख़लाक़ को खूबसूरत बनाता है। लेकिन अगर हम इसके उलट सख्ती से बात करें तो लोग हम से दूर हो जाएंगे, लेकिन वहीँ अगर नर्मी से बात करें तो दिलों को जीता जा सकता है। घर हो, काम हो या दोस्ती हर जगह नरमी अपनाने से माहौल बेहतर बनता है। और इस अमल को अल्लाह और उसके रसूल स.अ. पसंद फरमाते हैं |

नबी ﷺ ने फरमाया:
"सबसे अच्छा खाना वह है जो इंसान अपनी मेहनत की कमाई से खाए।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 2072

इस हदीस में हराम माल से बचने और सुस्ती से दूर रहने पर ज़ोर दिया गया है और कहा है कि हर इन्सान को अपने हाथों की मेहनत की कमाई ही खानी चाहिए। और जो इंसान अपनी मेहनत से कमाता है, तो उसका खाना सबसे बेहतर खाना होता है। और हलाल कमाई में बरकत होती है और ये बरकत दिलों को सुकून अता करती है और कम में भी आसान ज़िन्दगी मिलती है। लेकिन इसके उलट हराम कमाई कितनी ही ज्यादा क्यूँ न हो, लेकिन उसमें चैन नहीं होता।

एक आदमी ने नबी ﷺ से नसीहत मांगी। आपने फरमाया:
"गुस्सा मत करो।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 6116

वैसे तो यह छोटी सी हदीस है लेकिन हमारी ज़िन्दगी खुद में ख़ुद को और दूसरों को तकलीफ़ न पहुँचे इसलिए एक गहरा सबक़ दे जाती है। क्यूंकि गुस्सा बहुत सारी बुराइयों की जड़ है। इसलिए अगर इंसान गुस्से पर काबू पा ले, तो वह कई गुनाहों से बच सकता है।

Top 20 Hadees Quotes In Hindi With Translation
नबी ﷺ ने फरमाया:
"पाकीज़गी आधा ईमान है।"

सहीह मुस्लिम, हदीस नं. 223

इस हदीस में बताया गया है कि सफाई रखना और साफ़ सुथरा रहना हमारे ईमान का हिस्सा है और इस्लाम ने सफ़ाई पर इतना ज़ोर दिया है कि वज़ू ग़ुस्ल और नापाकी के बारे में खुल कर बताया है कि एक इंसान नापाक होने का पता कर सके और सफ़ाई और पाकीज़गी हासिल कर ले । साफ कपड़े, साफ जगह और साफ दिल ये सब एक मोमिन की पहचान हैं।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि अच्छी बात कहे या खामोश रहे।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 6018

इस हदीस का मतलब है कि हमें अपनी ज़ुबान का सही इस्तेमाल करना चाहिए और जब भी हम बोले सोच-समझकर बोलना चाहिए। यानि अगर हम अच्छी बात नहीं कह सकते, तो चुप रहना ही बेहतर है। कई बार हमको अंदाज़ा भी नहीं होता कि हमारी एक गलत बात किसी को गहरा दुख दे जाती है। इसलिए ज़ुबान को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है।

नबी ﷺ ने फरमाया:
"वह मोमिन नहीं जिसका पड़ोसी उसकी तकलीफ से सुरक्षित न हो।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 6016

इस हदीस में बताया गया है कि जिस तरह माँ-बाप, औलाद और घर वालों के कुछ हक़ हम पर होते हैं उसी तरह हम पर कुछ पड़ोसी के भी हक होते हैं और इस्लाम में पड़ोसी के हक़ की बड़ी अहमियत बताई है। तो याद रखिये! अगर हमारा पड़ोसी हमसे परेशान है, तो हमारा ईमान अधूरा है। मतलब ये कि हमें अपने आसपास रहने वालों को न सिर्फ तकलीफ़ देने से बचें बल्कि उनका ख्याल भी रखें, चाहे वे किसी भी धर्म के क्यूँ न हों।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"हया सिर्फ भलाई ही लाती है।"

सहीह बुखारी, हदीस नं. 6117

यह हदीस सिखाती है कि शर्म और हया इंसान की ज़िन्दगी में बहुत अहम् है अगर हया इन्सान के अन्दर है तो ये इन्सान गुनाह करना तो दूर उसके क़रीब जाने से भी बचायेगी। जिस इंसान में हया होती है, उसका कैरेक्टर को मजबूत होता है और वो कहीं भी लोगों की नज़र में शर्मिंदा होने से बच जाता है।

नबी ﷺ ने फरमाया:
"सदक़ा देने से माल कम नहीं होता।"

सहीह मुस्लिम, हदीस नं. 2588

इस हदीस से पता चलता है कि देने से कभी कमी नहीं होती। बल्कि जितना आप अल्लाह की राह में ख़र्च करेंगे अल्लाह उसमें और बरकत देते हैं। और इस तरह इन्सान दौलतमन्द भी बनता है और अल्लाह के क़रीब तर होता चला जाता है और ये बात रखिये ! जो इंसान दूसरों की मदद करता है, अल्लाह उसकी मदद करता है। इसलिए अपनी कमाई में थोड़ा सा हिस्सा ग़रीबों का ज़रूर लगाएं इंशाअल्लाह आपकी उम्र और दौलत में बरकत होगी।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"सब्र रोशनी है।"
सहीह मुस्लिम, 

इस छोटी सी हदीस में अगर आप ग़ौर करें तो सब्र को रोशनी कहा गया है, क्योंकि जब इंसान पर मुश्किल वक्त आता है, तो इंसान घबरा जाता है और जल्दबाज़ी में गलत फैसले ले लेता है। लेकिन जो सब्र करता है, वह सोच-समझकर कदम उठाता है। और यह सब्र इंसान को अंधेरे हालात में भी सही रास्ता दिखाता है।

याद रखिये! सब्र का मतलब सिर्फ चुप रहना नहीं है, बल्कि हालात को समझकर सही तरीके से संभालना है। जैसे बीमारी में सब्र, तंगी में सब्र, और लोगों की बातों पर सब्र ये सब इंसान को और मजबूत बनाते हैं। सब्र करने वाला इंसान टूटता नहीं, बल्कि और निखरता है। इसलिए हर परेशानी में सब्र को अपना सहारा बनाना चाहिए।

नबी ﷺ ने फरमाया:
"अल्लाह बंदे की मदद करता है जब तक बंदा अपने भाई की मदद करता है।"

सहीह मुस्लिम, हदीस नं. 2699

इस हदीस में अल्लाह ने एक बहुत खूबसूरत वादा किया है वो ये कि जब हम किसी की मदद करते हैं, तो अल्लाह हमारी मदद करता है। तो इसका मतलब ये हुआ कि इंसानियत और मदद का रिश्ता सीधा अल्लाह से जुड़ा हुआ है। इसलिए हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए ताकि जब हमें ज़रूरत पड़े तो हमारी मदद अल्लाह की तरफ़ से हो |

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"दुआ इबादत का सार है।"

जामिअ तिर्मिज़ी, हदीस नं. 3371

यह हदीस बताती है कि दुआ सिर्फ मांगना नहीं, बल्कि इबादत का सबसे खास हिस्सा है। यानि जब हम दुआ करते हैं, तो वैसे तो हम अपने लिए मांग रहे होते हैं लेकिन ये काम भी इबादत है यानि अल्लाह से माँगना भी इबादत है दुआ करने से हम सीधे अल्लाह से जुड़ते हैं। और हर छोटी-बड़ी जरूरत में दुआ करना हमें और अल्लाह के करीब लाता है।

नबी ﷺ ने फरमाया:
"जो हमारे छोटों पर रहम नहीं करता और बड़ों की इज़्ज़त नहीं करता वह हम में से नहीं।"

जामिअ तिर्मिज़ी, हदीस नं. 1919

इस हदीस में है कि छोटे बच्चों पर रहम करना और बड़ों की इज्ज़त करना इस्लाम की पहचान है। लेकिन अगर किसी इंसान में ये दोनों चीज़ें न हों, तो वह अच्छे अख़लाक़ से दूर है। और ऐसा इन्सान सारी इंसानियत के लिए तकलीफ़ की वजह बनेगा जो कि अल्लाह और उसके रसूल को बिलकुल भी पसन्द नहीं है।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"जिसने धोखा दिया वह हम में से नहीं।"

सहीह मुस्लिम, हदीस नं. 102

इस हदीस में बहुत सख्त चेतावनी है कि धोखा देने वाला मुसलमानों में से नहीं। चाहे बिज़नेस हो या रिश्ते अगर हम धोखा देते हैं, तो हम अख़्लाक़ी और इस्लामी उसूलों के खिलाफ जाते हैं। जबकि ईमानदारी हर काम की बुनियाद होनी चाहिए। इसी से दुनिया व आख़िरत दोनों में अपनी जगह बनती है |

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