5 Wealth Hacks नबी ﷺ के बताये हुए | रिज्क के 5 राज़

आज की दुनिया में हर कोई Warren Buffett के quotes ढूंढ रहा है। और उन की किताबें पढ़ रहा है। और YouTube पर “how to get rich” सर्च करने वालों की तादाद करोड़ों में है। ठीक है, जानना चाहिए और सीखना चाहिए क्यूंकि जानने से दिमाग़ खुलता है और फिर वो दिखने लगता है जो पहले नहीं दिखता था|

लेकिन साथ ही ये भी जानना चाहिए कि जिस तरह हमारे प्यारे पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने हमें छोटी से छोटी चीज़ों में गाइड किया है उसी तरह हमें दौलत हासिल करने के कुछ तरीके बताये हैं और कुछ अमल बताये हैं जिनसे दौलत के हासिल करने में आसानी होती है और दौलत मिल जाने के बाद उसमें बरकत होती है |

5 Wealth Hacks नबी ﷺ के बताये हुए

तो जब आप हदीस उठाएंगे तो उसमे देखेंगे कि इसमें हमारे नबी ने ऐसे 5 wealth hacks बताये हैं, और ऐसी नसीहतें की हैं, जो आज के किसी भी financial advisor की सलाह से कहीं ज़्यादा गहरी और असरदार हैं। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि उनकी बात सिर्फ़ bank balance नहीं बढ़ाती, बल्कि ज़िंदगी में बरकत भी लाती है। लेकिन अफ़सोस ये है कि आज ज़्यादातर मुसलमान इन नसीहतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

तो आइए, जानते हैं वो 5 ख़ास इस्लामी wealth strategies जिन्हें आप आज से ही अमल में ला सकते हैं।

हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ ने माल-ओ-दौलत के लिए कई दुआएँ सिखाई हैं। जिनको पढ़ना चाहिए लेकिन ये भी याद रहे कि दुआ कोई रस्म नहीं है, कि बस हाथ उठाए, कुछ अल्फ़ाज़ बोले, हो गया। बल्कि दुआ इससे कहीं ज़्यादा आगे की चीज़ है।उसको सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल की गहराई से करना चाहिए। हदीस में आता है:

पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया: "दुआ खुद एक इबादत है।" (तिर्मिज़ी)

जब आप सच्चे दिल से अल्लाह से माँगते हैं — रिज़्क़ के लिए, बरकत के लिए, सुकून के लिए — तो आप दरअसल ये इक़रार कर रहे होते हैं कि “मैं अकेला कुछ नहीं हूँ। ए अल्लाह! मुझे तेरी ज़रूरत है।”

लेकिन हम में से अक्सर लोग बेध्यानी में दुआ करते हैं और करते ही उसकी क़बूलियत में जल्दी करते हैं और सब्र नहीं रखते जबकि दुआ करने के बाद अल्लाह तआला दुआ कब और कैसे क़ुबूल करेगा, ये उसी की हिकमत पर छोड़ना चाहिए।

5 Wealth Hacks

क़ुरआन और हदीस दोनों बताते हैं कि लगातार इस्तिग़फ़ार (Astaghfirullah) पढ़ने से रिज़्क़ के दरवाज़े खुलते हैं।

कभी कभी इन्सान को ऐसा लगता है कि “मेहनत तो भरपूर कर रहा हूँ, कोशिश पूरी कर रहा हूँ लेकिन फिर भी कुछ अटका हुआ है नतीजा वो नहीं मिल रहा है जो मुझे चाहिए”?

शायद इसका जवाब इस्तिग़फ़ार में आपको मिल जाये। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

"जो शख़्स लगातार इस्तिग़फ़ार करता है, अल्लाह उसे हर तंगी से निकलने का रास्ता देता है और वहाँ से रिज़्क़ 
देता है जहाँ से उसे गुमान भी नहीं होता।"
(अबू दाऊद)

“जहाँ से गुमान भी नहीं होता” ज़रा ये जुमला ज़रा रुककर सोचिए।

जिसका मतलब है कि अल्लाह के रास्ते हमारी सोच से कहीं ज़्यादा बड़े हैं। हम सोचते हैं कि रिज़्क़ सिर्फ़ salary से आएगा, business से आएगा। लेकिन हक़ीक़त तो ये है कि अल्लाह के पास ऐसे रास्ते हैं जो हमारी imagination में भी नहीं।

अल्लाह को रिज्क पहुँचाने के लिए सैलरी या बिज़नस की भी ज़रुरत नहीं वो और भी रास्तों से पहुंचा सकता है जिसका गुमान भी हम नहीं कर सकते | और उन रास्तों को खोलने की चाबी “इस्तिग़फ़ार” है।

इमाम अहमद बिन हंबल का वो वाक़िया जो दिल छू लेता है

एक बार इमाम अहमद बिन हंबल रहमतुल्लाह अलैह सफ़र में थे। रात हो गई तो एक बेकर (नानबाई) ने उन्हें अपने घर में ठहराया। इमाम साहब ने देखा कि बेकर की जुबान से रात भर अपना काम करते वक़्त बस एक ही जुमला जारी था Astaghfirullah, Astaghfirullah…

सुबह इमाम साहब ने उससे पूछा: “भाई, तुम इतना इस्तिग़फ़ार क्यों करते हो?”

बेकर ने जवाब दिया: “इससे मेरी हर दुआ क़ुबूल होती है। अब बस एक दुआ बाकी रह गयी है कि मैं इमाम अहमद बिन हंबल को देख सकूँ।”

तो इमाम अहमद की आँखें भर आईं। उन्होंने कहा: “मैं ही अहमद बिन हंबल हूँ। अल्लाह ने मुझे तेरी दुआ की वजह से खुद तेरे दरवाज़े तक पहुँचा दिया।” ये होती है इस्तिग़फ़ार की ताक़त।

अल्लाह तआला का वादा है – और वो अपने वादे से नहीं पलटता:

"अगर तुम शुक्र अदा करोगे तो मैं तुम पर और नेमतें बढ़ा दूँगा।" (क़ुरआन 14:7)

ये कोई motivational quote नहीं है। बल्कि यह अल्लाह का वादा है कि शुक्र अल्लाह की नेअमतों को और बढ़ा देता है लेकिन ये भी सच है कि शुक्र करना उतना आसान भी नहीं जितना लगता है। क्यूंकि हम इंसान naturally उन चीज़ों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं जो हमारे पास नहीं है। और जो है, उसे हम For Granted लेते हैं।

एक छोटी सी मिसाल:

एक बच्चे को केक का एक टुकड़ा मिला। वो खुश है, मुस्कुरा रहा है, शुक्रगुज़ार है।

लेकिन वहीँ दूसरे बच्चे को पूरा केक मिला, लेकिन एक स्लाइस कम थी। फिर भी वो रो रहा है।

पहला बच्चा ज़्यादा खुश है कम पाकर भी। दूसरा नाखुश है ज़्यादा पाकर भी यही फ़र्क़ है शुक्र और नाशुक़्री में, और अल्लाह उसी को बढ़ाता है जो शुक्र करे।

शुक्रगुजार कैसे बनें?

आज रात सोने से पहले बस 3 चीज़ें लिखिए जिनके लिए आप शुक्रगुज़ार हैं। फिर देखिए कुछ हफ़्तों में ही ज़िंदगी का नज़रिया कैसे बदलता है।

ये बात तो हमारे और आपकी logic के ख़िलाफ़ लगती है, है ना? “दो तो माल बढ़ेगा?” ये कैसे हो सकता है?

लेकिन रसूलुल्लाह ﷺ ने साफ़ फ़रमाया: 

"सदक़ा माल को घटाता नहीं, बल्कि बढ़ाता है।"

(मुस्लिम)

और यहाँ एक दिलचस्प बात है “सबसे बेहतरीन सदक़ा वो है जो तंगी के वक़्त दिया जाए। जब आपकी अपनी जेब हल्की हो और आप फिर भी किसी की मदद करें, यही असली सदक़ा है।

सदक़ा सिर्फ़ पैसे का ही नहीं होता। बल्कि आपकी एक मुस्कान, किसी की मदद का एक लम्हा, कोई अच्छी बात कहना, आपको अल्लाह ने कोई हुनर या इल्म दिया है तो उस हुनर को किसी ज़रूरतमंद की मदद के लिए इस्तेमाल करना ये सब सदक़ा है।

और क़ुरआन में अल्लाह ने हमें balance की नसीहत दी है, न तो इतना कंजूस बनो कि हाथ गर्दन से बँधा हो, और न ही इतना फ़िज़ूलखर्च बनो कि बाद में पछताओ, बीच का रास्ता इख्तियार करो यही इस्लाम की शान है।

5 Wealth Hacks

और अब आता है वो secret weapon और सबसे ताक़तवर wealth hack, जिसे आज की दुनिया में सबसे ज़्यादा ignore किया जाता है। जिसके बारे में हमारे नबी ﷺ ने दुआ की थी:

 "ऐ अल्लाह! मेरी उम्मत के सुबह के वक़्त में बरकत रख।" 

(तिर्मिज़ी)

सुबह का वक़्त ख़ास कर “फ़ज्र से लेकर चाश्त तक” यानि “सुबह 5 से 9 बजे का वक़्त” यह वो golden window है जो ज़्यादातर लोग सोते हुए गँवा देते हैं। और ये भी याद रखें कि सुबह का उठना सिर्फ़ spiritual बात नहीं है। बल्कि आज की science भी यही कहती है कि सुबह के घंटे सबसे ज़्यादा productive होते हैं। उनमें दिमाग़ fresh होता है, distraction कम और focus ज़्यादा होता है।

लेकिन इस्लाम ने इस वक़्त की अहमियत 1400 साल पहले ही बता दी थी। और सबसे ख़ास बात यह है सुबह का यह वक़्त वो है जब आप बाकी चारों hacks को एक साथ अदा कर सकते हैं:

  • फ़ज्र के बाद दुआ – रिज़्क़ माँगिए
  • इस्तिग़फ़ार – 100 बार Astaghfirullah
  • शुक्र – 3 नेमतें याद करिए
  • सदक़ा – कोई भी छोटा अच्छा काम

बस 20-30 मिनट। और ये 20-30 मिनट आपके पूरे दिन को बदल सकते हैं।

असली दौलत सिर्फ़ numbers या bank balance का नाम नहीं, बल्कि क़नाअत (contentment), बरकत और अल्लाह की रज़ा है। अगर हम इन पाँच prophetic wealth hacks पर अमल करें तो इंशाअल्लाह दौलत भी बढ़ेगी और ज़िंदगी भी आसान होगी।

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