Surah Lahab in Hindi Translation & Explaination | सूरह लहब

क्या आपको मालूम है कि…एक शख्स ऐसा है जिसका नाम लेकर अल्लाह तआला ने क़ुरआन में उसकी बर्बादी और तबाही का ऐलान किया है, लेकिन क्यूँ ? आइये क़ुरान की छोटी सी सूरह “सूरह लहब” को पढ़ते हैं, आयत दर आयत तर्जुमा और तशरीह (Surah Lahab in Hindi Translation) को गहराई से समझते हैं |

लेकिन इस से पहले समझ लें कि ये सूरह सिर्फ एक आदमी की कहानी नहीं…बल्कि ये तकब्बुर (घमंड), दौलत के नशे, और दीन की दुश्मनी का अंजाम है। और ये सूरह हमें इस बात से आगाह करती है, कि अगर दिल हक़ के सामने न झुके, …तो नस्ल, माल, स्टेटस कुछ भी काम नहीं आता।

ये सूरह सिर्फ कहानी नहीं… बल्कि दीन का मज़ाक उड़ाने वालों, फितना फैलाने वालों और दौलत पर घमंड करने वालों के लिए चेतावनी है।

ये सूरह हमें बताती है कि रिश्ते-नाते अपनी जगह, लेकिन जब बात अल्लाह के दीन और उसके रसूल ﷺ की इज़्ज़त पर आ जाये, तो अल्लाह खुद अपने महबूब ﷺ का दिफ़ा (defend) करता है। चलिए शुरू करते है,|

जब अल्लाह तआला ने हज़रत मुहम्मद (सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम) को हक़ की दावत और अल्लाह की तरफ बुलाने का हुक्म दिया, तो आप ﷺ कोहे-सफ़ा (सफ़ा की पहाड़ी) पर चढ़े, और लोगों को आवाज़ दी, आवाज़ सुन कर जब लोग जमा हो गए,

तो आपने पूछा: “अगर मैं कहूँ कि इस पहाड़ के पीछे से एक लश्कर तुम पर हमला करने वाला है, तो क्या तुम मेरी बात मानोगे?”

सब ने एक ज़बान होकर कहा: “हाँ! क्यूँ नहीं मानेंगे, हमने तो आपको हमेशा सादिक़ (सच्चा) और अमीन पाया है।”

तब आपने फ़रमाया: “तो सुनो, मैं तुम्हें एक बड़े अज़ाब से डराता हूँ (अल्लाह पर ईमान लाओ)।”

ये सुनते ही भीड़ में से एक शख़्स उठा, जो हुज़ूर ﷺ का सगा चाचा था अबू लहब। उसने पत्थर उठाया और बड़े तकब्बुर (घमंड) से कहा: तुझ पर हलाकत हो! क्या तूने हमें इस काम के लिए जमा किया था?

अबू लहब की इस हरकत पर आसमान से जवाब आया और अल्लाह तआला ने जवाब में पूरी सूरह यानि “सूरह लहब” नाजिल कर दी|

Surah Lahab in Hindi Translation

पहली आयत जिसका तर्जुमा है “अबू लहब के दोनों हाथ टूट जाएँ, और वो हलाक हो जाये ।”

चूंकि उसने नबी पर हाथ उठाया था और कहा था तू हलाक हो इसलिए इसलिए क़ुरान ने सूरह लहब की पहली आयत में मुंहतोड़ जवाब दिया कि नबी नहीं बल्कि “अबू लहब के दोनों हाथ टूट जाएँ, और वो हलाक हो जाये ।”इसमें “तब्बत” का मतलब है तबाही, बर्बादी, नाम-ओ-निशान मिट जाना और यहाँ “हाथ टूट जाएँ” का मतलब सिर्फ हाथ नहीं है…बल्कि इशारा उसकी ताक़त, रसूख, असर, पावर की तरफ है।

अबू लहब कौन था ?:

अबू लहब नबी ﷺ का चाचा था, अमीर आदमी, और क़ुरैश का इज़्ज़तदार शख़्स था, लेकिन…दिल में हसद, घमंड और दीन से नफ़रत रखता था। उसे लगता था “मैं स्टेटस वाला हूँ, मेरे पास धन दौलत है, मुझे क्या होगा?” तब अल्लाह ने इस सूरह में उसको लताड़ लगायी और बता दिया कि ये स्टेटस और धन दौलत नजात नहीं देती, बल्कि दिल की हालत देती है।

Surah Lahab in Hindi Translation

अब दूसरी आयत जिसका तर्जुमा है “न तो उसका माल कुछ काम आया और न उसकी कमाई।

ये बात इसलिए कही गयी क्यूंकि अबू लहब बहुत अमीर और दौलतमंद आदमी था, कारोबार, शोहरत, बच्चे, ताक़त… सब कुछ उसके पास था। वो समझता था: “पैसा है, तो सब कंट्रोल में है।” लेकिन वो भूल गया था कि मौत और अज़ाब के सामने बैंक बैलेंस, प्रॉपर्टी, बिज़नेस सब ज़ीरो हो जाता है।

जब अल्लाह की तरफ बुलाया गया तो उसने घमंड में न सिर्फ नाकारा बल्कि मुकाबले के लिए खड़ा हो गया तो उसका ये अमल उसको तबाह और बर्बाद कर गया और कोई उसे बचा नहीं पाया न माल और न दौलत |

हालाँकि पूरे क़ुरआन में नबी के किसी भी दुश्मन का नाम लेकर उस पर लानत नहीं की गयी, लेकिन अबू लहब इतना बाद किस्मत था कि अल्लाह ने उसका नाम लेकर उसपर लानत की, क्यों? क्योंकि उसने पत्थर मारने के लिए उस पर हाथ उठाया था जो सारे जहाँ के लिए रहमत बनाकर भेजा गया था।

तो अल्लाह ने फ़रमाया: “तेरे हाथ क्या तोड़ेंगे, तू खुद बर्बाद हो गया!” उसे बड़ा नाज़ था अपनी दौलत पर और अपने बेटों पर। अल्लाह ने साफ़ कह दिया कि जब खुदा का अज़ाब आएगा, तो न तेरी तिजारत (बिज़नेस) काम आएगी, न तेरी शोहरत और न तेरी औलाद।

इस आयत से हमने क्या सीखा?

  1. बद-जु़बानी का अंजाम: अल्लाह अपने महबूब की शान में गुस्ताख़ी बर्दाश्त नहीं करता, देर सबेर वो अल्लाह की पकड़ में आता ही है।
  2. सिर्फ़ रिश्ता काफ़ी नहीं: अबू लहब नबी का सगा चाचा था, लेकिन ईमान नहीं था तो वो ‘अबू बक्र’ या ‘बिलाल’ नहीं बन सका।इससे पता चलता है कि रिश्ता तो वही माना जायेगा जो अल्लाह के लिए हो।
  3. तकब्बुर (Pride): दौलत और ताक़त इंसान को अंधा कर देती है, लेकिन वो अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकती।

अभी तक हमने देखा कि घमंड, दौलत और दीन से दुश्मनी की शुरुआत करने वाला इंसान मरता है, तो आगे क्या होता है? यहाँ से सूरह हमें सीधे आख़िरत का लाइव सीन दिखाती है। अब कहानी नहीं… फैसला सुनाया जा रहा है।

Surah Lahab in Hindi Translation

अब अगली आयत का तर्जुमा है “वो जल्द ही भड़कती हुई आग में डाला जाएगा।

यहाँ गौर कीजिये इस आयत में कहा गया है “सयसल़ा” जिसका मतलब है “ज़रूर दाख़िल होगा” यानि ये कोई अंदाज़ा नहीं… बल्कि अल्लाह का फ़ैसला है कि “ज़रूर दाख़िल होगा” और आयत का अगला टुकड़ा “नारन ज़ात लहब” यानि ऐसी आग: जो सिर्फ जलाती नहीं, बल्कि लपटों वाली, घेर लेने वाली आग है जिसमें वो डाला जायेगा |

यहाँ एक अजीब बात देखिए ! उसका नाम था “अबू लहब” (लपटों वाला) था, दुनिया में वो घमंड की आग में जलता था आख़िरत में जहन्नम की आग उसका इंतज़ार कर रही है। और अबू लहब का नाम ही ‘लहब’ (शोलों वाला) था क्योंकि उसके गाल सुर्ख थे। तो इसी पर अल्लाह ने फरमाया कि तुझे अपनी खूबसूरती और नाम पर नाज़ है? तो याद रख, तेरा अंजाम भी ‘लहब’ यानी भड़कती हुई आग ही है।

अबू लहब का अंजाम

अबू लहब का अंजाम ये हुआ कि उसे एक ज़हरीला ज़ख्म हो गया और उस ज़ख्म का असर पूरे बदन में फ़ैल गया, और इसी से उसको एक फैलने वाली बीमारी लग गयी, इसीलिए कोई उसके करीब नहीं आता था, उसी में पड़े पड़े आखिर वो मर गया और उसकी लाश 3 दिन तक पड़ी रही, क्यूंकि लोग बीमारी के डर से क़रीब नहीं जाते थे |

इसी तरह जब तीन दिन गुज़रने के बाद लाश सड़ गयी और बदबू बढ़ गयी तो गड्ढा खोद कर दूर ही से उसको उसमें धकेल दिया गया और ऊपर से पत्थरों से गड्ढे को बंद कर दिया |

Surah Lahab in Hindi Translation

अग्ली आयत का तर्जुमा है “और उसकी बीवी जो लकड़ियाँ ढोने वाली है।

अबू लहब अकेला नहीं था, उसके इस ज़ुल्म करने में उसकी बीवी, उम्मे जमील, बराबर की शरीक थी। वो हुज़ूर ﷺ के रास्ते में कांटे बिछाती थी और लोगों के बीच जाकर आप ﷺ की चुगली और ग़ीबत करती थी ताकि लोग इस्लाम से दूर रहें। तो अज़ाब में भी वो अपने शौहर के साथ ही होगी |

इसीलिए उसे ‘हम्मा-लतल हतब’ (लकड़ियाँ ढोने वाली) कहा गया। जिसका मतलब है क्यूंकि जंगल से कांटेदार लकड़ियाँ लाती और रातों को नबी ﷺ के रास्ते में बिछा देती थी।

    उसका हार बहुत क़ीमती था, वो कहती थी कि “मैं इसे बेचकर मोहम्मद (ﷺ) की दुश्मनी में ख़र्च करूँगी।” अल्लाह ने फरमाया, तेरे गले में उस हार की जगह मज़बूत रस्सी का फंदा होगा जो तुझे जहन्नुम की तरफ खींचेगा।

    Surah Lahab in Hindi Translation

    अग्ली आयत का तर्जुमा है “उसकी गर्दन में मज़बूत रेशे की रस्सी होगी।

    दुनिया में वो अपने गले में महँगे हार पहनती थी घमंड से चलती थी आख़िरत में: उसी गर्दन में रस्सी जो कि जिल्लत की निशानी होगी | “मसद” खुरदुरी रस्सी यानि:दर्द, जिल्लत, सज़ा

    अबू लहब की बीवी का अंजाम

    चूंकि वो लकड़ियाँ लाकर नबी ﷺ के रास्ते में बिछा देती थी। तो एक दिन लकड़ी लाते हुए रस्सी उसके गले में फँस गयी और उसका दम घुट गया और क़यामत में भी उसके गर्दन में तौक और बेड़ियों में जकड़ी जाएगी |

    • मेरा किरदार क्या है? क्या मैं अपने घर वालों या दोस्तों को ग़लत काम करने से रोकता हूँ? या मैं भी उम्मे जमील की तरह ‘आग सुलगाने’ (चुगली करने) का काम करता हूँ?
    • रास्ते के कांटे: अल्लाह के नेक बंदों के रास्ते में कांटे बिछाने वाले हमेशा नाकाम होते हैं। हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम किसी के लिए आसानियाँ पैदा करें, मुश्किलें नहीं।
    • मौत की हक़ीक़त: अबू लहब की मौत एक ऐसी बीमारी (Plague) से हुई कि उसके बेटों ने भी उसे हाथ नहीं लगाया और उसकी लाश सड़ गई। ये इस बात की निशानी है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख़्त है।

    सूरह लहब हमें डराती भी है… और जगाती भी। अल्लाह हमें उस रास्ते से बचाए जिस पर अबू लहब चला।

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