Tahajjud Namaz Ke 8 Fayde | तहज्जुद की नमाज़ के 8 फायदे

सोचिये…रात का वो आख़िरी पहर, जब दुनिया अँधेरे में डूबी होती है, और बे ख़बर सो रही होती है, हर तरफ़  सन्नाटा पसरा होता है और हर घर के दरवाज़े बंद होते हैं, लेकिन एक दरवाज़ा है जो उसी वक़्त खुलता है और वो है सारी कायनात के रब का। बस, यही वो वक़्त है जब कोई अगर चाहे तो अपने रब के सबसे ज़्यादा करीब हो सकता है। अपना ग़म सुना सकता है, अपना दुखड़ा रो सकता है, और अपनी मुराद पा सकता है |

लेकिन बहुत कम ऐसे अल्लाह के बन्दे हैं जो ऐसी मुबारक घड़ी में अपने रब को याद करने के लिए नर्म बिस्तर छोड़ देते हैं। और मुसल्ले पर खड़े होकर अल्लाहु अकबर कहते हुए अपनी नींद को और शैतान के बहकावे को मात दे देते हैं, फिर क्या, वो सारे जहानों का रब, वो सारी कायनात का मालिक, अपने बन्दे के क़दमों में दुनिया व आख़िरत के खज़ानों की चाबी डाल देता है |

और ये ख़ास वक़्त तहज्जुद का होता है और ख़ास नमाज़ नमाज़-ए-तहज्जुद है, जो इबादतों की रानी है, जो दुआओं की क़बूलियत, और दिलों की सफाई ज़रिया बनती है, दिलों में अजीब सा सुकून पैदा करती है। और बे मक़सद ज़िन्दगी से निकाल कर बा मकसद ज़िन्दगी की तरफ ले जाती है | और याद रखना ! तहज्जुद सिर्फ एक नमाज़ नहीं, बल्कि ये बंदे और अल्लाह के दरमियान ख़ास मुलाक़ात है।

इसीलिए आज हम जानेंगे तहज्जुद के हैरत-अंगेज़ फायदे ( Tahajjud Namaz Ke Fayde ) कौन कौन से हैं, जो न सिर्फ हमारी आखिरत संवारते हैं बल्कि हमारी दुनिया को भी बदल कर रख देते हैं।

तहज्जुद की नमाज़ का सही तरीका

तहज्जुद वो नमाज़ है जो इशा के बाद सोकर रात के किसी हिस्से में उठकर पढ़ी जाती है, खास तौर पर आख़िरी पहर में। वैसे तो ये नमाज़ फ़र्ज़ नहीं है, नफ्ल है लेकिन ऐसी नफ्ल नमाज़ है जो बंदे को अल्लाह के बहुत करीब कर देती है। चलिए पहले देखें क़ुरान और हदीस में इसके बारे में क्या कहा गया है |

Tahajjud Namaz Ke 8 Fayde

Tahajjud In Quran

और रात के कुछ हिस्से में तहज्जुद पढ़ा करें, यह आपके लिए नफ्ल (इज़ाफ़ी इबादत) है। अनक़रीब आपका 
रब आपको 'मक़ाम-ए-महमूद' पर फ़ाइज़ करेगा।"

क़ुरआन मजीद (सूरह बनी इस्राईल 17:79)

ग़ौर करें! गौर करें, अल्लाह तआला फरमा रहे हैं कि तहज्जुद के पाबन्द शख्स को ‘मक़ाम-ए-महमूद’, में पहुंचा देंगे  

‘मक़ाम-ए-महमूद’ क्या है?

‘मक़ाम-ए-महमूद’ का मतलब है, वो जगह जहाँ हर तरफ से तारीफ़ हो। मतलब यह है कि जो शख्स तहज्जुद की पाबंदी करता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त, वक़ार और बुलंदी अता फरमाता है। उसकी बात में असर पैदा हो जाता है और लोगों के दिलों में उसके लिए मोहब्बत डाल दी जाती है।

तो अज़ीज़ों ! यह कोई मामूली नमाज़ नहीं। यह वो इबादत है जो इंसान को आम बन्दों से उठाकर मक़ाम-ए-महमूद की तरफ़ ले जाती है।

तहज्जुद का वक़्त इतना ख़ास क्यों है? इसका जवाब हमें एक मशहूर हदीस में मिलता है। कि रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:

"हमारा रब (अल्लाह तआला) हर रात, जब रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा बाक़ी रह जाता है, तो वो 
आसमान-ए-दुनिया (सबसे निचले आसमान) पर आकर कहता है:

कौन है जो मुझसे दुआ मांगे, कि मैं उसकी दुआ क़बूल करूँ?
कौन है जो मुझसे मांगे, कि मैं उसे अता करूँ?
कौन है जो मुझसे बख्शिश (माफ़ी) तलब करे, कि मैं उसे माफ़ कर दूँ?"

सहीह बुख़ारी, सहीह मुस्लिम

सुब्हानल लाह! ज़रा सोचिये, बादशाहों का बादशाह खुद आपको बुला रहा है, और हम गफलत की नींद सो रहे हैं? यह वो वक़्त है जब मांगी गई कोई दुआ रद्द नहीं होती।

Tahajjud Namaz Ke 8 Fayde

अब आते हैं असली बात पर कि अगर तहज्जुद पढेंगे, तो आपके अन्दर क्या बदलाव आयेगा और क्या फ़ायदे आपको हासिल होंगे? और आपके अन्दर क्या Transformational change आयेगा?

तहज्जुद का सबसे बड़ा तोहफ़ा है अल्लाह का क़ुर्ब। जो शख़्स इस वक़्त खड़ा होता है, वो अल्लाह का महबूब बंदा बन जाता है। ज़रा सोचिए, दुनिया के किसी बड़े बादशाह या अफसर से मिलने के लिए हमें कितनी कोशिश करनी पड़ती है, लेकिन कायनात का मालिक खुद अपने बंदों को पुकारता है।

दिन में भी हम दुआ करते हैं, मगर तहज्जुद में की गई दुआ… सीधे दिल से निकलती है। और रात की ख़ामोशी, आँखों में नींद, दिल में सच्चाई ये चीज़ें दुआ को असरदार बना देते हैं। कई बुज़ुर्ग फरमाते हैं: “जो मसला लोगों से हल न हो, वो तहज्जुद में हल हो जाता है।”

तो अगर आपकी कोई ऐसी दुआ है जो बरसों से अटकी हुई है, या दिल में कोई ऐसा बोझ है जो हल्का नहीं हो रहा, तो तहज्जुद का वक्त आपके लिए ही है। क्योंकि ये वो घड़ी है जब मांगने वाले की झोली खाली नहीं रहती, और सवाल करने वाले का सवाल हमेशा पूरा किया जाता है ।

हम इंसान हैं और हमसे जाने-अनजाने में गलतियां और गुनाह हो ही जाते हैं। लेकिन तहज्जुद की नमाज़ हम जैसे आम इंसानों के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद की किरन है। क्यूंकि तहज्जुद पढ़ने वाला इंसान गुनाहों से दूर होने लगता है।

ये नमाज़ इंसान को रूहानी तौर पर पाक-साफ कर देती है। जैसे पानी मैल को धो देता है, वैसे ही रात के अंधेरे में बहाए गए आंसू और अल्लाह के हुज़ूर किया गया सजदा, इंसान के गुनाहों को मिटा देता है।

आज की दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी क्या है? बेचैनी, टेंशन, डिप्रेशन। मैं दावे से कहता हूँ कि जो भी आपकी तकलीफ़ हो, आप बस उसे तहज्जुद के सज्दे में बयान करना शुरू कर दीजिये, ख़ुद पर बीती अल्लाह को बताना शुरू कर दीजिये, अपने ग़मों को अल्लाह के सामने रखना शुरू कर दीजिये, इंशाअल्लाह तहज्जुद इन सबका इलाज देगी। और आप अपने अन्दर एक अजीब सी तब्दीली महसूस करेंगे जो शायद आपके बयान से बाहर होगी

याद रखना! रात की तन्हाई में जब इंसान सजदे में जाता है, अल्लाह के सामने अपना दुखड़ा रोता है तो दिल हल्का हो जाता है। रोना, दर्द बयान करना  ये रूह की थेरेपी है। तो जो तहज्जुद का आदी हो जाए, वो अंदर से मजबूत हो जाता है।

कई नेक लोगों का तजुर्बा है: तहज्जुद पढ़ने वाले का रिज़्क़ कभी तंग नहीं होता। 

क्यों? क्योंकि वो उस मालिक से मांगता है जिसके खज़ाने कभी खाली नहीं होते। और क्यूंकि सुबह रिज्क़ की तलाश में निकलने से पहले राज़िक (रिज्क देने वाले) को राज़ी कर चुका होता है, तो ज़ाहिर है अल्लाह उसकी ज़िन्दगी में बरकत की बारिश कर अता फरमा देंगे |

तहज्जुद पढ़ने वालों के चेहरों पर एक अलग सुकून, और एक अलग रोशनी होती है। क्यूंकि ये नूर सिर्फ वुज़ू का नहीं, बल्कि रात में बहाए गए आँसुओं का होता है। और ये नूर उस वक़्त का है जब सारी दुनिया सो रही थी और ये अल्लाह के सामने अपने आंसुओं से अपनी रूह के मैल को साफ़ कर रहा था, अल्लाह ने उसके ज़ाहिर और बातिन की सफ़ाई कर दी, जिसका असर उसके चेहरे पर साफ़ नूर की शक्ल में दिखने लगा |

क़ुरआन में बताया गया कि रात को उठने का मतलब अपने नफ़्स को तोड़ने और उसका मुकाबला करने का सबसे असरदार तरीका है। सूरह मुज़्ज़म्मिल में इस हवाले से बहुत गहरी बात कही गई है।

"إِنَّ نَاشِئَةَ اللَّيْلِ هِيَ أَشَدُّ وَطْئًا "

बेशक रात के वक़्त उठना ही ऐसा अमल है जिससे नफ्स अच्छी तरह कुचला जाता है (या काबू में आता है)
" सूरह अल-मुज़्ज़म्मिल, आयत न. 6

“अशद्दु वत-अन” का मतलब है कि रात का उठना नफ्स को कुचलने, उसे काबू में रखने और उस पर पांव जमाने के लिए सख्त तरीन अमल है ।

हम सब जानते हैं कि नींद कितनी प्यारी होती है। तो ऐसे में जब इंसान रात के उस वक़्त उठता है जब नींद ग़ालिब हो और जिस्म आराम मांग रहा हो, तो ये कोई आसान काम नहीं है कि आप बिस्तर छोड़कर अल्लाह के लिए खड़े हो जाएँ, लेकिन अगर आप ने ऐसा कर लिया तो आपने अपने नफ्स को हरा दिया। और अपने नफ्स को कंट्रोल में कर लिया, ये अमल (तहज्जुद में उठना) इंसान को अंदर से मज़बूत बनाता है ।

इसलिए, अगर आप अपने अंदर डिसिप्लिन (नज़्म-ओ-ज़ब्त) पैदा करना चाहते हैं और अपने नफ्स पर काबू पाना चाहते हैं, तो तहज्जुद से बेहतर कोई ट्रेनिंग नहीं है।

रात के वक़्त क़याम( अल्लाह के सामने खड़ा होना) इंसान को मजबूत बनाता है। जो शख़्स तहज्जुद का पाबंद हो जाए, वो जिंदगी की मुश्किल जिम्मेदारियाँ भी संभाल सकता है। ये रूहानी ट्रेनिंग है। जैसे कि

अल्लाह तआला ने सूरह मुज़्ज़म्मिल में फरमाया:

"إِنَّا سَنُلْقِي عَلَيْكَ قَوْلًا ثَقِيلًا"

तर्जुमा: "बेशक हम आप पर एक भारी कलाम नाज़िल करने वाले हैं।"

(सूरह मुज़्ज़म्मिल, आयत 5)

इससे मालूम हुआ कि तहज्जुद सिर्फ सवाब का काम नहीं है, बल्कि इससे इंसान ज़िंदगी की बड़ी से बड़ी ज़िम्मेदारियां उठाने के काबिल बनता है। रात की तन्हाई में इबादत करने से इंसान के अंदर वो रूहानी ताकत पैदा होती है जो उसको मुश्किलात का सामना करने और बड़े मकसद (Mission) को पूरा करने में मदद देती है ।

अगर आप ज़िंदगी में कोई बड़ा काम करना चाहते हैं, कोई बड़ा मकसद हासिल करना चाहते हैं, तो तहज्जुद से एनर्जी हासिल करें। ये आपको “भारी ज़िम्मेदारियों” को उठाने के लिए तैयार करती है। इसके बारे में मैं एक शेर कहना चाहूँगा कि

मुसाफ़िर शब् को उठते हैं 

जो जाना दूर होता है

तहज्जुद सिर्फ नमाज़ नहीं, इश्क़ है। ये दिखावे की इबादत नहीं, छुपी हुई इबादत है। लोग नहीं देखते, लेकिन अल्लाह देखता है, और वही असली इनाम देने वाला है।

तो अगर अब तक तहज्जुद नहीं पढ़ी, तो आज से शुरू करें, अलार्म लगाएँ। सिर्फ 2 रकअत पढ़ें। सजदे में अपना दर्द कहें आप देखेंगे, ज़िंदगी बदलना शुरू हो जाएगी।

तो दोस्तों, खुलासा ये है कि नमाज़-ए-तहज्जुद सिर्फ एक नमाज़ नहीं, बल्कि ये अल्लाह से दोस्ती का नाम है । ये गुनाहों की माफी का ज़रिया है, दिल के सुकून का बाइस है ।

आपके लिए अगला कदम: क्या आप आज रात से ही कोशिश करेंगे? ज़रूरी नहीं कि आप घंटों जागें। सिर्फ 10-15 मिनट पहले उठ कर दो रकात नमाज़ पढ़ कर देखें। वो सुकून जो आपको मिलेगा, वो दुनिया की किसी दौलत में नहीं।

अल्लाह हमें इस “खूबसूरत अज्र” को पाने की तौफीक दे।

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