Roza Kin Chizon Se Tootta Hai? 14 चीज़ों से रोज़ा टूट जाता है

रमज़ान का महीना “बरकत” और “रहमत” का महीना है। और इस महीने में हम बड़े शौक़ और अक़ीदत से रोज़ा रखते हैं, लेकिन कई बार अनजाने में हम से ऐसे काम हो जाते हैं, जिनसे हमारा रोज़ा टूट जाता है, और हमें पता भी नहीं चलता। और फिर इस दिन भर की भूक प्यास का कोई मतलब ही नहीं रह जाता |

इसीलिए आज हम आपके सामने बयान करेंगे कि Roza Kin Chizon Se Tootta Hai? । तो अगर आप रोज़ा रख रहे हैं और यह नहीं पता कि कौन सी बात रोज़े को तोड़ती है, तो यह पोस्ट आपके लिए ही है। इसे पूरा पढ़िए, समझिए, और अपने घर वालों तक ज़रूर पहुंचाइए। क्योंकि रोज़े के मसाइल जानना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है। क्यूंकि अगर आपको ये बातें पता नहीं होंगी, तो हो सकता है कि आप पूरे दिन भूखे-प्यासे रहें और रोज़ा फिर भी क़बूल न हो | तो चलिए! शुरू करते हैं |

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Roza Kin Chizon Se Tootta Hai?

(Things That Break The Fast)

यहाँ पर 14 चीज़ें बयान की गयी हैं, जिनसे रोज़ा यक़ीनी तौर पर टूट जाता है:

अगर कोई शख़्स जानते-बूझते रोज़े की हालत में कुछ भी खा लेता है या पी लेता है तो चाहे वह एक दाना हो, एक कतरा पानी हो, उसका रोज़ा टूट जायेगा।

अब एक अहम सवाल आप के ज़हन में आयेगा कि अगर भूलकर कुछ खा पी लिया तो? तो इसका जवाब यह है कि भूलकर खाने-पीने से रोज़ा नहीं टूटता।

सहीह बुखारी की एक रिवायत है कि आप (ﷺ) ने फरमाया:

"अगर कोई रोज़ेदार भूलकर खा ले या पी ले, तो उसे चाहिए कि अपना रोज़ा पूरा करे, क्योंकि उसे
अल्लाह ने खिलाया और पिलाया है।"

(सहीह बुखारी: 1933)

लेकिन एक बात ख़ास तौर पर याद रखिए: खाते वक़्त जैसे ही आपको याद आये कि “मैं तो रोज़े से था”, तो फ़ौरन रुक जाइए। इससे रोज़ा नहीं टूटेगा लेकिन अगर कोई भूल से खा रहा था, याद आने के बाद उसने सोचा “यार, अब तो खा ही लिया है, थोड़ा और खा लेता हूँ” तो अब यह जान-बूझकर खाना हुआ इससे रोज़ा टूट जाएगा।

एक और बात: अगर किसी को मसअला नहीं पता था कि भूलकर खाने से रोज़ा नहीं टूटता, और उसने भूलकर कुछ खाया, फिर सोचा “रोज़ा तो टूट ही गया” और दोबारा जानकर खा लिया तो उसका रोज़ा टूट जाएगा। इसीलिए मसाइल जानना ज़रूरी है।

Roza Kin Chizon Se Tootta Hai?

रोज़े की हालत में मुश्त ज़नी (मास्टरबेशन) करना बहुत बड़ा गुनाह है। अगर कोई ऐसा करता है और मनी (Semen) निकल जाती है, तो रोज़ा टूट जाएगा। इसके बाद उस रोज़े की क़ज़ा करना ज़रूरी होगा और क़ज़ा कैसे करें इस पर पहले हम लिख चुके हैं.

  • दीनी सबक: इस्लाम में मुश्त ज़नी वैसे भी हराम और बड़ा गुनाह है, और रोज़े जैसी पाकीज़ा हालत में तो यह और भी संगीन हो जाता है, इसलिए हर हाल में इससे बचें,
  • एक और मसअला है कि अगर किसी ने यह काम किया लेकिन मनी नहीं निकली, तो रोज़ा तो नहीं टूटेगा, लेकिन रोज़े की हालत में ऐसी हरकत करना सख़्त गुनाह और नाज़ायज़ है, इससे रोज़े का सवाब ख़त्म हो जाता है।

अगर कोई रोज़ेदार अपनी नाक में दवा (Nasal drops) डालता है, तो वह दवा दिमाग़ या हलक़ (गले) तक पहुँच जाती है, जिससे रोज़ा टूट जाता है।तो अगर किसी ने नाक में दवाई डाली जो गले तक पहुँच जाए, तो रोज़ा टूट जायेगा।

यह एक ऐसा मसअला है जिससे बहुत लोग ग़ाफ़िल रहते हैं। नाक के ज़रिए अगर कोई चीज़ अंदर चली जाए तो रोज़ा नहीं बचता। इसलिए रोज़े की हालत में नाक में कोई भी चीज़ न डालें।

बीड़ी, सिगरेट या हुक्का पीने से भी रोज़ा टूट जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब आप इन्हें पीते हैं, तो इनका धुआँ आपके हलक़ (गले) से नीचे उतर जाता है। और गले से नीचे अगर कोई भी ऐसी चीज़ उतरेगी, तो रोज़ा फ़ासिद हो जाएगा।

हम जब वुज़ू करते वक़्त गलाला (ग़रग़रा) करते हैं, तो कभी-कभी ग़लती से पानी हलक़ से नीचे उतर जाता है। तो अगर आप रोज़े से हैं और कुल्ली करते वक़्त ग़लती से भी पानी गले से नीचे चला गया, तो रोज़ा टूट जाएगा। इसीलिए रोज़े की हालत में ग़रग़रा करने से मना किया जाता है ताकि पानी अंदर न जाए।

यह एक आम ग़लती है जो बहुत लोगों से होती है। वज़ू करते वक़्त या मुँह साफ़ करते वक़्त अगर ग़लती से भी पानी गले से नीचे चला जाए, तो रोज़ा टूट जाता है। बहुत लोग सोचते हैं, “अरे, ग़लती से गया, कोई बात नहीं।” लेकिन नहीं, इस सूरत में भी रोज़ा टूट जाएगा। इसीलिए रोज़े की हालत में वज़ू करते वक़्त गलाला (ग़रग़रा) मना किया गया है | पानी को गले तक मत जाने दीजिए।

अगर किसी को ख़ुद-ब-ख़ुद (Natural) उल्टी आ जाए, चाहे वह कितनी ही ज़्यादा क्यों न हो, उससे रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता। लेकिन अगर कोई जान-बूझकर उंगली डालकर या किसी और तरीक़े से उल्टी करने की कोशिश करता है और मुँह भरकर उल्टी हो जाती है, तो उसका रोज़ा टूट जाएगा।

अच्छी तरह समझ लें – अगर उल्टी खुद-ब-खुद आ जाए वो चाहे कम हो या ज़्यादा हो, बार-बार भी हो, तो रोज़ा नहीं टूटेगा। लेकिन अगर किसी ने जान-बूझकर उँगली डालकर या किसी और तरीक़े से उल्टी की, और वह उल्टी मुँह भर हो गई, तो रोज़ा टूट जाता है। फर्क साफ है, खुद-ब-खुद हो तो ठीक है, जानबूझकर हो तो रोज़ा जाएगा

अगर किसी औरत (महिला) ने रोज़ा रखा हुआ है और दिन में उसे ‘हैज़’ (Periods/Menstruation) शुरू हो जाए, तो उसका रोज़ा उसी वक़्त टूट जाएगा। इसी तरह अगर कोई रोज़ेदार खातून है और बच्चे की पैदाइश हो जाती है (निफ़ास का ख़ून शुरू हो जाता है), तो भी रोज़ा टूट जाएगा।

यह उनकी ग़लती नहीं है, यह एक फ़ितरी बात है। जब तक उनके यह ख़ास दिन ख़त्म न हो जाएँ, तब तक वो रोज़ा नहीं रखेंगी और छूटे हुए रोज़ों की बाद में क़ज़ा करेंगी।

बहुत सी बीमारियाँ ऐसी होती हैं जिनमें मरीज़ को आगे या पीछे की शर्मगाह (Private parts/Suppositories) में दवा रखनी पड़ती है। रोज़े की हालत में अगर कोई इस तरह दवा रखता है, तो उसका रोज़ा टूट जाएगा।

हाँ, अगर कोई ऐसी बीमारी है कि दवा रखना बहुत ज़रूरी है, तो बेहतर है कि आप यह रोज़ा बाद में (क़ज़ा) कर लें। अगर दवा के बिना काम चल सकता है, तो उसे इफ़्तार के बाद इस्तेमाल करें।

हार्ट पेशेंट्स (दिल के मरीज़) अक्सर ज़बान के नीचे दवा रखते हैं। इसमें एक तफ़सील (Detail) है:

  • अगर वह दवा ज़बान के नीचे रखने के बाद थूक के रास्ते से गले के नीचे उतर जाती है, तो रोज़ा टूट जाएगा।
  • लेकिन अगर वह कोई ऐसी दवा है जो गले से नीचे नहीं जाती, बल्कि सिर्फ़ ज़बान के नीचे मौजूद रगों (Veins) में जज़्ब (Absorb) हो जाती है, तो उससे रोज़ा नहीं टूटेगा।

फिर भी, अगर दवा के बिना गुज़ारा हो सकता है तो रोज़े में इसे न रखें, या अपने डॉक्टर और किसी मुफ़्ती साहब से अपनी दवा के बारे में सही मशवरा लें।

अगर किसी को ज़ुकाम या साँस की तकलीफ़ है और वह दवा का भपारा (Steam/Vapor) लेता है, तो रोज़े की हालत में दवा की भाप अंदर खींचने से भी रोज़ा टूट जाता है।

Roza Kin Chizon Se Tootta Hai?

अस्थमा के जो मरीज़ होते हैं, उन्हें साँस के लिए इन्हेलर लेना पड़ता है। रोज़े की हालत में इन्हेलर का इस्तेमाल करने से रोज़ा टूट जाता है। अगर आपका इन्हेलर के बिना बिल्कुल काम नहीं चलता, तो अल्लाह आपको शिफ़ा दे, ऐसी मजबूरी में आप रोज़ा न रखें और बाद में अल्लाह ने जो सहूलत दी है (क़ज़ा) उस पर अमल करें। अल्लाह तकलीफ़ नहीं देना चाहता वह आसानी चाहता है।

लेकिन अगर इफ़्तार तक इन्हेलर के बिना काम चल सकता है, तो रोज़े की हालत में इसे इस्तेमाल न करें।

ये मसअला ख़ूब अच्छी तरह समझ लीजिये, क्यूंकि ये ग़लती बहुत भारी पड़ सकती है और अगर इस ग़लती पर रोज़ा टूटा तो बाद में सिर्फ एक रोज़ा रखने से काम नहीं चलेगा बल्कि कफ़्फ़ारा देना होगा और कफ्फारा कहते हैं लगातार 60 रोज़े रखना यानि एक ग़लती और उसकी सज़ा मियां बीवी दोनों को बगैर नागा 60 रोज़े रखने होंगे |

वो मसअला है रोज़े की हालत में मियाँ-बीवी अगर हमबिस्तरी (Physical intimacy/Intercourse) करते हैं और उनकी शर्मगाहें मिल जाती हैं, तो चाहे मनी निकले या न निकले, रोज़ा टूट जाएगा। ऐसा करने पर सिर्फ़ क़ज़ा ही नहीं, बल्कि कफ़्फ़ारा (लगातार 60 रोज़े रखना) देना होगा।

कुछ और बातें और जान लें:

  • अगर मियाँ-बीवी ने प्यार-मोहब्बत की बातें करते वक़्त बीवी का थूक शौहर के मुँह में गया और अंदर चला गया — तो शौहर का रोज़ा टूट जाएगा।
  • अगर शौहर का थूक बीवी के मुँह में गया, तो बीवी का रोज़ा टूट जाएगा।
  • अगर प्यार-मुहब्बत के दौरान शौहर की मनी निकल गई, तो शौहर का रोज़ा टूट जाएगा।
  • अगर बीवी की मनी निकल गई, तो बीवी का रोज़ा टूट जाएगा।

इसीलिए दिन के वक़्त रोज़े की हालत में मियाँ-बीवी को एक-दूसरे से दूर रहना चाहिए और बिला-वजह क़रीब नहीं होना चाहिए ताकि रोज़े जैसे अज़ीम फ़रीज़े (कर्तव्य) में कोई ख़राबी न आए।

रोज़े की हालत में ग़लत चीज़ें जैसे मूवी या कोई ग़लत वीडियो देखने की वजह से अगर किसी की मनी (Semen) निकल जाती है, तो उसका रोज़ा टूट जाएगा।

अगर कोई रोज़े से है और कोई दूसरा शख़्स उसे मार-पीट कर, धमकी देकर या ज़बरदस्ती (Forcefully) कुछ खिला या पिला देता है, तब भी रोज़ा टूट जाएगा।

सवाल 1: अगर रोज़े में ख़ुद-ब-ख़ुद उल्टी हो जाए, तो क्या मेरा रोज़ा टूट जाएगा?

जवाब: जी नहीं, अगर उल्टी नेचुरल तरीक़े से ख़ुद-ब-ख़ुद हुई है, तो चाहे वह कितनी ही ज़्यादा क्यों न हो, आपका रोज़ा नहीं टूटेगा।

सवाल 2: अगर मैं कुल्ली कर रहा था और पानी अचानक गले में चला गया, तो क्या हुक्म है?

जवाब: अगर आपको याद था कि आपका रोज़ा है और कुल्ली करते वक़्त पानी हलक़ से नीचे उतर गया, तो रोज़ा टूट जाएगा। आपको बाद में इसकी क़ज़ा करनी होगी।

सवाल 3: क्या लिपस्टिक या परफ्यूम लगाने से रोज़ा टूटता है?

जवाब: नहीं, लिपस्टिक या परफ्यूम लगाने से रोज़ा नहीं टूटता। (बशर्ते लिपस्टिक का ज़ायका मुँह के अंदर न जाए)।

सवाल 3: खुद-ब-खुद उल्टी हो जाए तो?

खुद-ब-खुद उल्टी होने से रोज़ा नहीं टूटता चाहे कितनी बार ही क्यूँ न हो।

सवाल 4: अस्थमा पेशेंट इनहेलर यूज़ करें तो?

इनहेलर यूज़ करने से रोज़ा टूट जाता है लेकिन अगर बिना इनहेलर काम नहीं चलता, तो उस दिन रोज़ा छोड़ दें और बाद में क़ज़ा करें।

एक अहम पैग़ाम और दुआ

मेरे प्यारे भाइयो और बहनो, रोज़ा महज़ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह हमारे नफ़्स (इच्छाओं) को कंट्रोल करने की एक बेहतरीन ट्रेनिंग है। जिन मसाइल का ज़िक्र ऊपर किया गया है, वो हमारे रोज़मर्रा के मसाइल हैं। शैतान अक्सर हमें वसवसों (Doubts) में डालता है, इसलिए सही दीन की समझ होना हमारे लिए निहायत ज़रूरी है।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ है कि वह हमें दीन की सही समझ अता फ़रमाए। हमारे रोज़ों को क़बूल फ़रमाए, हमारी इबादतों में इख़्लास (ईमानदारी) पैदा करे और हमें रोज़े के तमाम मसाइल को सही से समझकर उन पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन!

इस मालूमात (जानकारी) को सदक़ा-ए-जारिया समझकर अपने अपनों, घर वालों और दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें।

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